जहानाबाद सिविल कोर्ट को बम की धमकी ! ईमेल आते ही मची अफरातफरी; छावनी में तब्दील हुआ कोर्ट परिसर

HIGHLIGHTS: खौफ के साये में ‘इंसाफ की चौखट’

  • सनसनीखेज धमकी: अज्ञात ईमेल के जरिए जहानाबाद सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की दी गई चेतावनी।
  • हाई अलर्ट: सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल के साथ SDO और SDPO मौके पर पहुंचे।
  • सघन तलाशी: मेटल डिटेक्टर और खोजी कुत्तों के जरिए परिसर के हर कोने की जांच; आने-जाने वालों की कड़ी फ्रिस्किंग।
  • पुलिस मुख्यालय का निर्देश: बिहार के सभी न्यायालयों में सुरक्षा बढ़ाने के आदेश के बाद जहानाबाद में विशेष सख्ती।

जहानाबाद | 17 मार्च, 2026

​जहानाबाद में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब न्याय के मंदिर—सिविल कोर्ट—को बम से उड़ाने की धमकी भरा एक ईमेल प्राप्त हुआ। मंगलवार की दोपहर जब कोर्ट की कार्यवाही चल रही थी, तभी इस खबर ने वकील, मुवक्किल और कर्मचारियों के बीच दहशत फैला दी। प्रशासन ने बिना समय गंवाए पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया है।

मैदान में उतरे आलाधिकारी: चप्पे-चप्पे पर नजर

​धमकी की गंभीरता को देखते हुए जहानाबाद के एसडीओ (SDO) राजीव कुमार सिन्हा और एसडीपीओ (SDPO) मनीष चंद्र चौधरी खुद कमान संभालने पहुंचे।

  1. कड़ा पहरा: मुख्य गेट पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं और हर व्यक्ति की गहन तलाशी ली जा रही है।
  2. सघन अभियान: कोर्ट के कमरों, गलियारों और पार्किंग एरिया की बारीकी से जांच की गई ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु का पता लगाया जा सके।
  3. दहशत का माहौल: अचानक बढ़ी पुलिस सक्रियता से वहां मौजूद लोगों में अफरातफरी देखी गई, लेकिन अधिकारियों ने धैर्य बनाए रखने की अपील की है।

अधिकारियों का पक्ष: “हम अलर्ट पर हैं”

​”न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद एहतियातन यह कदम उठाया गया है। पूरे परिसर की गहन जांच जारी है और हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।”

राजीव कुमार सिन्हा, एसडीओ, जहानाबाद

​”पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर बिहार के सभी न्यायालयों की सुरक्षा कड़ी की गई है। हम उस संदिग्ध ईमेल की भी पड़ताल कर रहे हैं जहाँ से यह धमकी भेजी गई है।”

मनीष चंद्र चौधरी, एसडीपीओ, जहानाबाद

VOB का नजरिया: डिजिटल धमकी या कोई बड़ी साजिश?

​जहानाबाद कोर्ट को दी गई यह धमकी केवल एक शरारत है या किसी गहरी साजिश का हिस्सा, यह जांच का विषय है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि अदालतों को निशाना बनाना सीधे तौर पर कानून व्यवस्था को चुनौती देना है। हाल के दिनों में ईमेल के जरिए संस्थानों को डराने का चलन बढ़ा है, ऐसे में साइबर सेल को उस ‘IP एड्रेस’ तक जल्द पहुंचना होगा जिसने यह मेल भेजा है। सुरक्षा बढ़ाना जरूरी है, लेकिन डर के माहौल को खत्म करना और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजना ही असली समाधान है।

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