तेजाब पीड़ितों के मुफ्त इलाज के लिए अस्पतालों में लगे बोर्ड: जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद

पटना। तेजाब हमलों के पीड़ितों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और उन्हें त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कई अहम निर्देश और सुझाव सामने आए। कार्यक्रम में पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने कहा कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में स्पष्ट रूप से बोर्ड लगाए जाएं, जिसमें यह लिखा हो कि यहां एसिड अटैक पीड़ितों का मुफ्त इलाज किया जाता है।

उन्होंने कहा कि कानून के तहत तेजाब पीड़ितों को निशुल्क इलाज का अधिकार है, लेकिन जानकारी के अभाव में कई लोग इसका लाभ नहीं उठा पाते। इसलिए जरूरी है कि स्वास्थ्य विभाग सभी अस्पतालों को तत्काल इस संबंध में निर्देश जारी करे। उन्होंने यह भी कहा कि महिला से जुड़े गंभीर अपराधों के मामलों में मुफ्त इलाज की व्यवस्था पहले से ही लागू है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में और सुधार की जरूरत है।

ने चिंता जताई कि कई बार अस्पतालों को मुफ्त इलाज के बदले मिलने वाली राशि का भुगतान समय पर नहीं होता, जिससे व्यवस्था प्रभावित होती है। उन्होंने लंबित मुआवजा मामलों पर भी नाराजगी जताई और कहा कि 2015-16 से लंबित मामलों का जल्द निपटारा किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय पर मुआवजा नहीं मिलता है तो पीड़ितों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

कार्यक्रम में पटना हाईकोर्ट के ही न्यायाधीश ने कहा कि एसिड अटैक के मामलों में दोषियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान है, जिसमें न्यूनतम 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा शामिल है। उन्होंने तेजाब की बिक्री पर सख्त नियंत्रण और नियमों के कड़ाई से पालन की जरूरत पर बल दिया।

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार पीड़ितों को समय पर मुआवजा और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं डीजीपी ने बताया कि 2012 के बाद से राज्य में 160 एसिड अटैक के मामले सामने आए हैं, जिनमें से 108 पीड़ितों को मुआवजा दिया जा चुका है।

समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदन प्रेयषी ने बताया कि हाल के वर्षों में एसिड अटैक के मामलों में वृद्धि हुई है और पीड़ितों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 181 भी संचालित किया जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के लिए एसिड अटैक पीड़ितों का मुफ्त इलाज करना अनिवार्य है।

कार्यक्रम में बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के सदस्य सचिव धर्मेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि अब तक 104 पीड़ितों को 2.55 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है, जबकि हाल के दिनों में 81 पीड़ितों के बीच 1.75 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।

कुल मिलाकर, इस कार्यक्रम में तेजाब पीड़ितों के अधिकारों, मुफ्त इलाज, मुआवजा और कानूनी सहायता को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया, साथ ही संबंधित विभागों को इन प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

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