​धनरुआ के निजामत गांव में ‘खूनी रविवार’: भैंस के विवाद में दादा ने पोते के सीने में उतारी गोली, दादी के श्राद्ध में सूरत से आए इकलौते चिराग का बुझा जीवन

धनरुआ/पटना। रिश्तों की मर्यादा और खून के जुड़ाव पर जब लालच और अहंकार हावी होता है, तो समाज को धनरुआ जैसी रूह कंपा देने वाली घटनाओं का सामना करना पड़ता है। पटना जिले के धनरुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत निजामत गांव में रविवार, 5 अप्रैल 2026 की सुबह एक ऐसी वारदात हुई जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी गहरा प्रहार किया है। महज एक भैंस को खोलकर ले जाने के मामूली विवाद में 72 वर्षीय चचेरे दादा ने अपने ही 25 वर्षीय पोते सोनू कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना उस समय और भी मार्मिक हो जाती है जब पता चलता है कि मृतक सोनू अपने पिता भूषण प्रसाद का इकलौता पुत्र था और वह कुछ दिन पहले ही अपनी दादी के निधन पर उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने सूरत से घर लौटा था। जिस घर में अभी दादी के जाने का मातम खत्म नहीं हुआ था, वहां अब इकलौते बेटे की अर्थी उठने की तैयारी है।

विवाद की पटकथा: शुक्रवार की शराब और ‘देख लेने’ की धमकी

​निजामत गांव में मचे इस तांडव की बुनियाद रविवार को नहीं, बल्कि दो दिन पहले शुक्रवार की शाम को ही पड़ गई थी। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की शाम आरोपी बिजेन्द्र यादव और उसके चचेरे पोते सोनू कुमार के बीच शराब पीने के दौरान किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक हुई थी। नशे की हालत में बिजेन्द्र यादव ने सोनू को सरेआम ‘देख लेने’ और अंजाम भुगतने की धमकी दी थी। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह मामूली कहासुनी एक खूनी रंजिश में बदल जाएगी।

​रविवार की सुबह बिजेन्द्र यादव ने अपने सगे पोते रौशन कुमार के साथ मिलकर एक साजिश रची। उन्होंने सोनू के घर के बाहर बंधी भैंस को खोल लिया और जबरन अपने घर ले जाकर बांध दिया। जब सोनू को इस बात का पता चला, तो वह सहज भाव से अपनी भैंस वापस लेने बिजेन्द्र के घर पहुँचा। उसने जैसे ही भैंस के गले का खूंटा खोलना शुरू किया, बिजेन्द्र यादव कट्टा लेकर बाहर निकला और बिना किसी हिचकिचाहट के सोनू के सीने को निशाना बनाकर गोली दाग दी।

दम तोड़ती उम्मीदें: दनियावां से एनएमसीएच तक का संघर्ष

​गोली की आवाज सुनते ही पूरा गांव दहल उठा। सोनू लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा। परिजन और ग्रामीण आनन-फानन में उसे लेकर दनियावां स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पहुँचे। वहां के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार कर खून रोकने की कोशिश की, लेकिन गोली सीने के गहरे हिस्से में धंसी थी। स्थिति को अत्यंत चिंताजनक देखते हुए उसे तुरंत पटना के एनएमसीएच (NMCH) रेफर कर दिया गया। अस्पताल के गलियारों में परिजनों की चीख-पुकार के बीच डॉक्टरों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन इलाज के दौरान सोनू ने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की खबर मिलते ही निजामत गांव में सन्नाटा पसर गया और भूषण प्रसाद के घर में कोहराम मच गया।

अपराध का ‘हॉटस्पॉट’ बना निजामत: पुलिस की सुस्ती और तस्करी का बोलबाला (विशेष विश्लेषण)

द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, यह हत्याकांड केवल एक पारिवारिक विवाद का नतीजा नहीं है, बल्कि यह उस प्रशासनिक विफलता का भी परिणाम है जो सुदूर ग्रामीण इलाकों में पैर पसार रही है।

  1. शराब और हथियार का गठजोड़: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि निजामत गांव में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब का निर्माण और हथियारों की तस्करी का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। शुक्रवार को हुई शराब पार्टी इसी का प्रमाण है। जब गांव में अवैध हथियार आसानी से उपलब्ध होंगे, तो छोटी-छोटी बातों पर गोली चलना एक सामान्य घटना बन जाती है।
  2. पुलिस की दूरी, अपराधियों की मजबूती: निजामत गांव धनरुआ थाने से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भौगोलिक दूरी का फायदा उठाकर अपराधी यहाँ बेखौफ रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, पुलिस की गश्ती न के बराबर होती है, जिससे अपराधियों के मन में कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है।
  3. इकलौते वारिस का अंत: सूरत में काम कर अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा बनने वाला सोनू अब इस दुनिया में नहीं है। एक पिता के लिए इससे बड़ी त्रासदी क्या होगी कि जिस बेटे को उसने दादी के श्राद्ध के लिए बुलाया था, आज वह खुद उसी घर से विदा हो गया।

प्रशासनिक रुख: एसडीपीओ कन्हैया सिंह की दबिश और बरामदगी

​घटना की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ-2 कन्हैया सिंह और धनरुआ थाना पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं, जिसमें एक कट्टा और एक खोखा बरामद हुआ है। कन्हैया सिंह ने बताया कि यह हत्या पूर्व के विवाद और तात्कालिक उकसावे का परिणाम है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।

​अधिकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी बिजेन्द्र यादव वारदात के बाद से ही फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं जो संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। मामले की वैज्ञानिक जांच के लिए एफएसएल (FSL) की टीम को भी बुलाया गया है ताकि मौके से मिले फिंगरप्रिंट्स और बैलिस्टिक साक्ष्यों का मिलान किया जा सके। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि परिजनों के लिखित आवेदन मिलते ही प्राथमिकी दर्ज कर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संतुलित नजरिया: समाज में बढ़ती असहनशीलता और ‘अहंकार’

​एक तटस्थ दृष्टिकोण से देखें तो 72 साल के बुजुर्ग द्वारा 25 साल के नौजवान की हत्या करना समाज के गिरते नैतिक मूल्यों को दर्शाता है। जहाँ उम्र के इस पड़ाव पर व्यक्ति को मार्गदर्शन करना चाहिए, वहां बिजेन्द्र यादव ने मौत का रास्ता चुना। भैंस जैसे मामूली विवाद के पीछे छिपा ‘शराब का नशा’ और ‘पुराना द्वेष’ बिहार के ग्रामीण अंचलों की कड़वी हकीकत है। यदि शुक्रवार की धमकी के बाद ही गांव के बड़े-बुजुर्ग या स्थानीय चौकीदार पुलिस को सूचित कर देते, तो शायद आज सोनू जीवित होता।

न्याय की प्रतीक्षा में सिसकता परिवार

​6 अप्रैल 2026 की यह सुबह निजामत गांव के लिए शोक और आक्रोश लेकर आई है। सोनू कुमार का जाना उस व्यवस्था पर तमाचा है जो शराबबंदी और अपराध मुक्त बिहार के दावे करती है। 20 किलोमीटर दूर बैठी पुलिस और गांव में बिकता ज़हर—ये दो ऐसी कड़ियां हैं जिन्होंने एक इकलौते बेटे की जान ले ली। अब सबकी नजरें कन्हैया सिंह और उनकी टीम पर हैं कि वे कब तक आरोपी बिजेन्द्र यादव को सलाखों के पीछे पहुँचाते हैं।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस दुखद घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है और इस मामले के हर कानूनी मोड़ पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। फिलहाल, गांव में तनावपूर्ण शांति है और पुलिस बल की तैनाती की गई है।

  • ये भी पढ़े..

    पटना में ‘जॉब माफिया’ का बड़ा खेल बेनकाब! बैंकिंग परीक्षा पास कराने और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी, 5 गिरफ्तार

    Share Add as a preferred…

    PMCH में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का औचक निरीक्षण, नर्सिंग सेवा पर मिली शिकायत तो मौके पर लगाई फटकार

    Share Add as a preferred…