HIGHLIGHTS: चंपारण में अपराधियों के हौसले बुलंद; मौत के साये में व्यवसायी का परिवार
- सनसनीखेज वारदात: पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि थाना क्षेत्र स्थित उज्जैनलोहियार गाँव में बीती रात अपराधियों ने कामता मिश्र के घर को बनाया निशाना।
- अंधाधुंध फायरिंग: दहशत फैलाने के लिए अपराधियों ने ताबड़तोड़ 5 राउंड गोलियां चलाईं; गनीमत रही कि किसी को गोली नहीं लगी।
- पुरानी रंजिश या दहशतगर्दी? व्यवसायी कामता मिश्र को एक साल पहले उनकी दुकान में घुसकर भी गोली मारी गई थी, जिससे वे 6 महीने तक अस्पताल में रहे थे।
- पुलिसिया एक्शन: अरेराज डीएसपी रवि कुमार और हरसिद्धि थाना पुलिस मौके पर पहुँची; अपराधियों की धरपकड़ के लिए घेराबंदी शुरू।
मोतिहारी | 20 मार्च, 2026
पूर्वी चंपारण का हरसिद्धि इलाका एक बार फिर गोलियों की तड़तड़ाहट से थर्रा उठा है। उज्जैनलोहियार गाँव के रहने वाले हार्डवेयर व्यवसायी कामता मिश्र और उनका परिवार कल रात ‘मौत’ के बहुत करीब से गुजर गया। अपराधियों ने उनके घर पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसका शोर सुनकर पूरे गाँव में सन्नाटा पसर गया है। सवाल यह है कि जब एक व्यवसायी पर पहले भी जानलेवा हमला हो चुका हो, तो पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था कहाँ सोई हुई थी?
दहशत की वो रात: जब दीवारों में धंस गई गोलियां
गायघाट चौक पर हार्डवेयर की दुकान चलाने वाले कामता मिश्र के घर पर हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे:
- टारगेट अटैक: रात के अंधेरे का फायदा उठाकर अपराधियों ने करीब 5 राउंड फायरिंग की।
- बाल-बाल बचा परिवार: गोलियां खिड़कियों और दीवारों से टकराती रहीं, लेकिन परिवार का कोई सदस्य इसकी चपेट में नहीं आया।
- इतिहास की पुनरावृत्ति: ठीक एक साल पहले, अपराधियों ने कामता मिश्र की दुकान में घुसकर उन्हें गोली मार दी थी। उस हमले के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि घर पर हुई इस फायरिंग ने परिवार को बुरी तरह तोड़ दिया है।
पुलिस का दावा: “जल्द होंगे सलाखों के पीछे”
सूचना मिलते ही अरेराज डीएसपी रवि कुमार मौके पर पहुँचे और घटनास्थल का मुआयना किया।
- पहचान की कोशिश: पुलिस आसपास के सीसीटीवी और पुराने अपराधियों के रिकॉर्ड खंगाल रही है।
- डीएसपी का बयान: डीएसपी ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया है कि अपराधियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
VOB का नजरिया: क्या ‘रंगदारी’ या ‘पुरानी दुश्मनी’ का शिकार है व्यवसायी?
मोतिहारी की यह घटना बिहार पुलिस की ‘इंटेलिजेंस’ पर एक बड़ा तमाचा है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि एक ही व्यवसायी पर सालभर के भीतर दूसरा बड़ा हमला होना यह दर्शाता है कि अपराधी कानून से बेखौफ हैं।
जब कामता मिश्र को पिछले साल गोली मारी गई थी, तभी से उन्हें और उनके प्रतिष्ठान को कड़ी सुरक्षा मिलनी चाहिए थी। क्या पुलिस केवल ‘जांच जारी है’ वाले रटे-रटाए बयान के पीछे छिपी रहेगी? यह हमला साफ तौर पर ‘रंगदारी’ या ‘गवाह को डराने’ की नीयत से किया गया लगता है। अगर व्यवसायी ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो बिहार के ‘औद्योगिक परिदृश्य’ और ‘समृद्धि यात्रा’ के दावों का क्या होगा? चंपारण पुलिस को अब फाइलों से बाहर निकलकर सड़कों पर खौफ का जवाब खौफ से देना होगा।


