
भागलपुर के सबौर थाना क्षेत्र अंतर्गत बाबूपुर गांव से एक बेहद अफसोसजनक घटना सामने आई है। जहाँ भक्ति और श्रद्धा के माहौल के बीच ‘प्रसाद’ के वितरण को लेकर उपजे मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। इस खूनी संघर्ष में एक युवक बुरी तरह जख्मी हो गया है, जिसका इलाज फिलहाल अस्पताल में चल रहा है। घटना के बाद से गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
श्रद्धा के बीच बढ़ा ‘अहंकार’ का विवाद
मिली जानकारी के अनुसार, बाबूपुर गांव में भव्य भागवत कथा का आयोजन किया गया था। रविवार देर रात कथा की पूर्णाहुति के बाद प्रसाद बांटा जा रहा था। भक्ति भाव से सराबोर ग्रामीण बड़ी संख्या में वहां मौजूद थे, जिससे काफी भीड़ हो गई थी।
- कहासुनी से मारपीट तक: इसी आपाधापी के बीच अजय कुमार नामक युवक की गांव के ही कुछ अन्य युवकों—अंकित, उत्तम, सौरभ और शिवम से किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
- लाठी-डंडों से हमला: देखते ही देखते मामला गरमा गया और आरोप है कि चारों युवकों ने मिलकर अजय कुमार पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमला इतना भीषण था कि अजय को संभलने का मौका भी नहीं मिला और वह खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़ा।
अस्पताल में जंग और पुलिसिया जांच
घटना के बाद वहां भगदड़ मच गई। स्थानीय लोगों और परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए घायल अजय कुमार को भागलपुर के प्रसिद्ध मायागंज अस्पताल (JLNMCH) में भर्ती कराया। डॉक्टरों के मुताबिक अजय की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उसे काफी गहरी चोटें आई हैं।
सूचना मिलते ही सबौर थाना पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने अस्पताल पहुँचकर पीड़ित का बयान लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोपियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई गई है, हालांकि सभी आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए गांव और आसपास के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
VOB का नजरिया: आस्था के आंगन में हिंसा क्यों?
भागवत कथा जैसे धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य शांति और भाईचारा बढ़ाना होता है। लेकिन बाबूपुर की इस घटना ने समाज की बढ़ती असहनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ‘प्रसाद’ वितरण जैसी पवित्र व्यवस्था के दौरान लाठी-डंडे चलना यह दर्शाता है कि आपसी रंजिश भक्ति पर हावी हो रही है। पुलिस को चाहिए कि वह न केवल दोषियों को जल्द पकड़े, बल्कि गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ठोस कदम भी उठाए।


