
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बन गया है। उम्मीदवार बदलने के फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। संगठन ने अब बूथ स्तर तक अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है और पूरे चुनाव अभियान को ‘माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल’ पर संचालित किया जा रहा है।
बीजेपी ने पहले घोषित प्रत्याशी अभिषेक सिन्हा का नाम वापस लेने के बाद युवा नेता नीरज सिन्हा को मैदान में उतारा है। इसके बाद संगठन ने चुनाव प्रचार की पूरी रणनीति बदलते हुए कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक सक्रिय कर दिया है।
नितिन नवीन की प्रतिष्ठा भी दांव पर
बांकीपुर लंबे समय तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का विधानसभा क्षेत्र रहा है। ऐसे में इस उपचुनाव को सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं बल्कि पार्टी की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार नितिन नवीन इन दिनों दिल्ली में हैं, लेकिन वहीं से लगातार चुनावी तैयारियों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मंडल अध्यक्षों, बूथ प्रभारियों और चुनाव संचालन समिति के साथ रोजाना फोन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा की जा रही है। हर दिन मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर रणनीति में बदलाव भी किया जा रहा है।
422 बूथों पर अलग-अलग प्रभारी तैनात
बीजेपी ने इस चुनाव में बूथ प्रबंधन को सबसे बड़ा हथियार बनाया है। बांकीपुर विधानसभा के 422 बूथों पर अलग-अलग नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें विधायक, सांसद, जिला पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष और मोर्चा पदाधिकारी शामिल हैं।
हर बूथ प्रभारी को अपने क्षेत्र के मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखने और मतदान के दिन अधिकतम समर्थकों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने का लक्ष्य दिया गया है।
माइक्रो मैनेजमेंट पर सबसे ज्यादा फोकस
बीजेपी ने वार्डवार और मोहल्लावार प्रचार कार्यक्रम तैयार किए हैं। किस इलाके में कौन नेता जाएगा, कब रोड शो होगा, किस वार्ड में नुक्कड़ सभा होगी और किन क्षेत्रों में घर-घर संपर्क अभियान चलाया जाएगा, इसका पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है।
पार्टी की कोशिश है कि प्रचार का कोई इलाका और कोई वर्ग छूटने न पाए।
उम्मीदवार बदलने के बाद डैमेज कंट्रोल
उम्मीदवार बदलने के फैसले के बाद बीजेपी अब डैमेज कंट्रोल में भी जुटी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं बल्कि भविष्य में संभावित विवादों से बचने के लिए लिया गया।
साथ ही संगठन यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि पार्टी ने किसी बड़े राजनीतिक परिवार के बजाय संगठन के एक समर्पित कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाकर कार्यकर्ताओं का सम्मान बढ़ाया है।
युवा चेहरे पर बीजेपी का बड़ा दांव
चुनाव प्रचार के दौरान नीरज सिन्हा को क्षेत्र के जमीनी, सक्रिय और युवा कार्यकर्ता के रूप में पेश किया जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे मोहल्ला बैठकों, जनसंपर्क और सोशल मीडिया के माध्यम से यही संदेश लोगों तक पहुंचाएं कि बीजेपी संगठन में मेहनत करने वालों को आगे बढ़ाती है।
24 घंटे में बदला उम्मीदवार बना चर्चा का विषय
बांकीपुर उपचुनाव का सबसे चर्चित पहलू उम्मीदवार बदलना रहा। बीजेपी ने पहले अभिषेक सिन्हा को टिकट दिया, लेकिन लगभग 24 घंटे के भीतर उनका नाम वापस लेकर नीरज सिन्हा को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
विपक्ष लगातार इस फैसले को मुद्दा बना रहा है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और राष्ट्रीय जनता दल बीजेपी पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे संगठनात्मक निर्णय बताकर चुनावी तैयारी को और तेज करने में जुटी हुई है।
अब सबकी नजर चुनावी नतीजों पर
उम्मीदवार परिवर्तन, बूथ स्तर की रणनीति, संगठन की सक्रियता और विपक्ष के हमलों के बीच बांकीपुर उपचुनाव अब बिहार की राजनीति का सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला बन चुका है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की बूथ मैनेजमेंट रणनीति और युवा चेहरे पर लगाया गया दांव कितना असर दिखाता है, जबकि विपक्ष इसे कितना बड़ा चुनावी मुद्दा बना पाता है।


