
बिहटा। राजधानी पटना से सटे बिहटा के राघोपुर इलाके में सोमवार को एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई जिसने पूरे छात्र समुदाय और अभिभावकों को दहशत में डाल दिया है। राघोपुर स्थित मौआर कॉलोनी में किराये के मकान में रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही 18 वर्षीय छात्रा अनुपमा कुमारी की गला दबाकर हत्या कर दी गई। हत्या की खबर फैलते ही इलाके में कोहराम मच गया और सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए। छात्रा का शव उसके कमरे में बेड पर पड़ा मिला, जिसे देखकर पहली नजर में ही यह स्पष्ट हो गया कि अपराधियों ने बड़ी बेरहमी से इस वारदात को अंजाम दिया है। मूल रूप से औरंगाबाद जिले के खुदवा थाना अंतर्गत मालवा डिहुरी की रहने वाली अनुपमा पिछले तीन वर्षों से बिहटा में रहकर एक निजी कॉलेज से इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर रही थी। इस घटना ने एक बार फिर छात्रों की सुरक्षा और किराये के मकानों में रहने वाले विद्यार्थियों की मॉनिटरिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुंडी खोलते ही उड़ गए होश: खौफनाक मंजर का खुलासा
वारदात का खुलासा सोमवार दोपहर उस वक्त हुआ जब काफी कोशिशों के बाद भी अनुपमा का फोन नहीं उठा। परिजनों के मुताबिक, रविवार सुबह से ही वे अनुपमा को फोन लगा रहे थे, लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा था। अनहोनी की आशंका को देखते हुए परिजनों ने बिहटा में ही रहने वाले अपने कुछ रिश्तेदारों और मकान मालिक को इसकी जानकारी दी। जब रिश्तेदार और मकान मालिक अनुपमा के कमरे पर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि कमरे का दरवाजा बाहर से कुंडी (लैच) लगाकर बंद किया गया था। बाहर से ताला नहीं लगा होने के कारण उन्हें लगा कि शायद अनुपमा अंदर ही होगी।
जैसे ही लोगों ने कुंडी खोली और कमरे के भीतर दाखिल हुए, वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अनुपमा का शव बेड पर बेतरतीब हालत में पड़ा था। उसके शरीर पर संघर्ष के निशान थे, जो इस बात की गवाही दे रहे थे कि उसने अपनी जान बचाने के लिए अपराधियों से मुकाबला किया होगा। तुरंत इसकी सूचना बिहटा थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष दल-बल के साथ मौके पर पहुँचे और घटनास्थल की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत एफएसएल (फॉरेनसिक) की टीम को भी बुलाया गया।
निशानों ने बयां की हैवानियत: गला दबाकर ली गई जान
पुलिस और फॉरेनसिक टीम ने जब शव का बारीकी से मुआयना किया, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। छात्रा के गले पर गहरे जख्म के निशान थे, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट है कि उसकी हत्या गला दबाकर की गई है। इसके अलावा, उसके हाथ और पैरों पर भी चोट के निशान पाए गए हैं। पुलिस को संदेह है कि हत्यारों ने पहले उसे काबू में करने के लिए उसके हाथ-पैर मरोड़े या बांधे होंगे और फिर गला घोंट दिया। हत्या के बाद अपराधियों ने बड़ी चतुराई से कमरे को बाहर से बंद कर दिया ताकि किसी को शक न हो और वे आसानी से फरार हो सकें।
जांच के दौरान पुलिस ने छात्रा का कमरा पूरी तरह सील कर दिया है। कमरे से मिले मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को जब्त कर लिया गया है ताकि कॉल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया गतिविधियों के जरिए किसी संदिग्ध का सुराग मिल सके। हालांकि, हत्या का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन पुलिस प्रेम प्रसंग, आपसी रंजिश या लूटपाट जैसे सभी संभावित पहलुओं पर गहनता से जांच कर रही है।
कॉलेज में चल रहा था समारोह, रविवार से था फोन बंद
अनुपमा जिस निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ती थी, वहां इन दिनों वार्षिक समारोह (Annual Function) की धूम थी। परिजनों ने बताया कि वह अपनी पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर रहती थी। रविवार सुबह से उसका फोन बंद होना या कॉल रिसीव न करना ही सबसे बड़ी पहेली बनी हुई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शनिवार रात या रविवार की सुबह अनुपमा से मिलने कौन आया था। क्या अपराधी उसका कोई परिचित था जिसे उसने खुद कमरे के भीतर आने दिया, या फिर अपराधियों ने जबरन कमरे में घुसकर इस वारदात को अंजाम दिया?
कॉलोनी के लोगों का कहना है कि उन्होंने शनिवार शाम तक अनुपमा को देखा था, लेकिन उसके बाद क्या हुआ किसी को खबर नहीं लगी। मौआर कॉलोनी एक घनी आबादी वाला क्षेत्र है, ऐसे में दिनदहाड़े या रात के सन्नाटे में हुई इस हत्या ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। थानाध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि घटनास्थल के आसपास लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि आने-जाने वाले संदिग्धों की पहचान की जा सके।
एक किसान पिता के सपनों का दर्दनाक अंत
अनुपमा औरंगाबाद के एक साधारण किसान अशोक शर्मा की बेटी थी। किसान पिता ने अपनी सबसे छोटी बेटी को इंजीनियर बनाने का सपना देखा था और अपनी सीमित आय के बावजूद उसे पटना के पास बिहटा में पढ़ाई के लिए भेजा था। अनुपमा तीन बहनों और एक भाई में सबसे छोटी और सबकी लाडली थी। उसकी इस अकाल मृत्यु ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। औरंगाबाद से बिहटा पहुँचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता बार-बार एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी मासूम बेटी की किसी से क्या दुश्मनी हो सकती थी?
ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हजारों छात्र बिहटा और उसके आसपास के इलाकों में किराये पर कमरा लेकर रहते हैं। इस घटना ने उन सभी छात्रों के मन में डर पैदा कर दिया है। छात्रों का कहना है कि अक्सर मकान मालिक केवल किराये से मतलब रखते हैं और सुरक्षा के नाम पर वहां कोई इंतजाम नहीं होता। सीसीटीवी कैमरों की कमी और बाहरी लोगों का अनियंत्रित प्रवेश ऐसी वारदातों के लिए खाद-पानी का काम करता है।
जांच की दिशा और पुलिस की चुनौतियां
बिहटा पुलिस के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बन गया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही समय और अन्य विवरणों का पता चल सकेगा। पुलिस की टीमें अलग-अलग बिंदुओं पर काम कर रही हैं:
- मोबाइल डंप डेटा: घटनास्थल के आसपास उस समय सक्रिय मोबाइल टावरों का डंप डेटा निकाला जा रहा है ताकि संदिग्ध नंबरों की पहचान हो सके।
- कॉलेज के मित्र और संपर्क: अनुपमा के कॉलेज के दोस्तों और साथ रहने वाली सहेलियों से पूछताछ की जा रही है ताकि उसके हालिया व्यवहार या किसी संभावित तनाव के बारे में जानकारी मिल सके।
- मकान मालिक से पूछताछ: क्या हाल के दिनों में कोई अजनबी अनुपमा के बारे में पूछताछ करने आया था, इस पर भी जांच केंद्रित है।
थानाध्यक्ष अमित कुमार ने भरोसा दिलाया है कि अपराधियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले हैं जिन पर काम किया जा रहा है। हालांकि, बिहटा जैसे उभरते हुए एजुकेशनल हब में इस तरह की घटना का होना प्रशासन के लिए शर्मिंदगी की बात है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि छात्र बहुल इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाई जाए और किरायेदारों का सत्यापन अनिवार्य रूप से कराया जाए।
अनुपमा की हत्या ने बिहार में बढ़ते अपराध और छात्रों की असुरक्षा को एक बार फिर नेशनल हेडलाइन बना दिया है। एक होनहार छात्रा, जो अपने भविष्य की नींव रखने शहर आई थी, वह अब केवल फाइलों में एक ‘केस नंबर’ बनकर रह गई है। समाज और प्रशासन के लिए यह सोचने का समय है कि आखिर हमारी बेटियां अपने ही कमरों में कितनी सुरक्षित हैं? औरंगाबाद की यह बेटी अब कभी इंजीनियर बनकर अपने पिता का सहारा नहीं बन पाएगी, लेकिन उसकी मौत ने जो सवाल खड़े किए हैं, उनके जवाब पूरा बिहार मांग रहा है।


