पटना | 28 फरवरी, 2026: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की आहट के बीच आज बिहार की राजनीति में एक नई इबारत लिखी गई। समाज कल्याण विभाग द्वारा बिहार विधान सभा के विस्तारित भवन में महिला विधायकों और विधान पार्षदों के लिए एक विशेष ‘उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम’ आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य साफ है—नीति बनाने वाली महिलाओं को योजनाओं की इतनी गहरी समझ देना कि वे अपने क्षेत्रों में अंतिम पंक्ति की महिलाओं तक विकास पहुँचा सकें।
क्यों पड़ी इस विशेष सत्र की जरूरत?
महिला एवं बाल विकास समिति की बैठक में यह महसूस किया गया कि महिला जनप्रतिनिधि क्षेत्रों में बेहद सक्रिय हैं, लेकिन कई बार योजनाओं की तकनीकी बारीकियों और अद्यतन (Updated) जानकारी के अभाव में वे चाहकर भी लोगों की पूरी मदद नहीं कर पातीं।
- समाधान: विभाग ने ट्रेनिंग के जरिए इस ‘इन्फोर्मेशन गैप’ को भरने का फैसला लिया।
- लक्ष्य: महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों को सशक्त बनाना।
मंच से गूँजे विचार: “महिलाएं कमजोर नहीं, सक्षम नेतृत्वकर्ता हैं”
कार्यक्रम में राज्य के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे दिग्गजों ने महिला जनप्रतिनिधियों का उत्साहवर्धन किया:
“बिहार की बेटियाँ हर क्षेत्र में पहचान बना रही हैं। पंचायती राज में आरक्षण ने ऐतिहासिक परिवर्तन किया है। महिलाएँ केवल प्रतिनिधि नहीं, बल्कि सक्षम नेतृत्वकर्ता हैं।”
— अवधेश नारायण सिंह, माननीय सभापति, बिहार विधान परिषद
- मदन सहनी (समाज कल्याण मंत्री): उन्होंने जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकता विकास की मुख्यधारा में महिलाओं को रखना है और इसके लिए जनप्रतिनिधियों का सहयोग अनिवार्य है।
- डॉ. प्रेम कुमार (विधान सभा अध्यक्ष): उन्होंने विधायिका और कार्यपालिका के बीच तालमेल को सशक्त विकास का आधार बताया।
- बंदना प्रेयषी (सचिव, समाज कल्याण): उन्होंने आश्वासन दिया कि विभाग भविष्य में भी ऐसे संवाद और प्रशिक्षण के लिए सदैव तत्पर रहेगा।
तकनीकी सत्र: ‘ICDS’ से ‘UNICEF’ तक का मंथन
केवल भाषण ही नहीं, बल्कि एक गहन तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें योजनाओं के क्रियान्वयन की चुनौतियों पर चर्चा हुई:
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विभाग/संस्था |
प्रमुख फोकस क्षेत्र |
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ICDS निदेशालय |
आंगनबाड़ी और पोषण योजनाएँ |
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सामाजिक सुरक्षा निदेशालय |
पेंशन और दिव्यांग कल्याण योजनाएँ |
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UNICEF / UNFPA |
बाल संरक्षण और महिला स्वास्थ्य रणनीतियाँ |
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C3 / SMC |
सामुदायिक जागरूकता और सशक्तिकरण |
समारोह में मंचासीन अतिथि
इस गरिमामय कार्यक्रम में शासन और प्रशासन के कई प्रमुख चेहरे उपस्थित रहे:
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- श्री मदन सहनी, डॉ. प्रेम कुमार, श्री अवधेश नारायण सिंह
- श्रीमती अश्वमेध देवी, श्रीमती बंदना प्रेयषी
- श्री धर्मेंद्र कुमार, श्रीमती रंजिता, श्री योगेश कुमार सागर
VOB का नजरिया: जब ‘नेतृत्व’ शिक्षित होगा, तभी ‘समाज’ सुरक्षित होगा
बिहार में 50% महिला आरक्षण (स्थानीय निकायों में) ने राजनीतिक चेतना तो पैदा की, लेकिन ‘प्रशासनिक समझ’ विकसित करने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों की बहुत कमी थी। समाज कल्याण विभाग की यह पहल सराहनीय है। जब एक महिला विधायक अपने क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ किसी योजना की बारीकियां समझाती है, तो वह न केवल एक नेता, बल्कि बदलाव की वाहक (Change Agent) बन जाती है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


