Highlights:
- मिशन: लघु जल संसाधन विभाग के 20 अभियंताओं की दूसरी टीम पुणे पहुँची।
- ट्रेनिंग: नेशनल वॉटर एकेडमी (NWA) में ‘जल संसाधनों की मूल बातें’ पर 5 दिवसीय सत्र।
- तकनीक: रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) और GIS के जरिए सीखी जा रही है वॉटर मैपिंग।
- फील्ड विजिट: अहमद नगर के आदर्श गांव ‘हिवरे बाजार’ का दौरा करेंगे इंजीनियर्स।
पटना: बिहार में खेती और सिंचाई की सूरत बदलने के लिए नीतीश सरकार अब ‘डिजिटल वॉटर मैनेजमेंट’ पर दांव लगा रही है। इसी कड़ी में लघु जल संसाधन विभाग के 20 अभियंताओं की दूसरी टीम सोमवार को पुणे स्थित राष्ट्रीय जल अकादमी (NWA) पहुँच गई है। 2 मार्च से 7 मार्च तक चलने वाले इस उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य बिहार के सरकारी इंजीनियर्स को जल प्रबंधन की नवीन तकनीकों से लैस करना है।
रिमोट सेंसिंग और GIS: आसमान से होगी पानी की निगरानी
प्रशिक्षण के पहले दिन का सत्र काफी तकनीकी रहा। अभियंताओं को पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक दृष्टिकोण से रूबरू कराया गया:
- स्पेशियल प्रोसेसिंग: सैटेलाइट डेटा के जरिए जल स्रोतों की सटीक पहचान करना।
- जियो-रेफरेंस्ड मैप: डिजिटल मैप तैयार कर यह पता लगाना कि किस इलाके में जल संचयन (Water Harvesting) की सबसे ज्यादा जरूरत है।
- कैचमेंट एरिया: जल ग्रहण क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करना।
पाइप सिंचाई और भू-जल प्रबंधन: अगले 5 दिनों का मास्टरप्लान
इंजीनियर्स का यह प्रशिक्षण केवल किताबी नहीं बल्कि ‘हैंड्स-ऑन’ यानी प्रैक्टिकल आधारित है। आने वाले दिनों में वे ये मुख्य कौशल सीखेंगे:
- हाइड्रोलॉजी के सिद्धांत: जल संसाधन आधारित योजनाओं के डिजाइन और प्रबंधन का वैज्ञानिक तरीका।
- पाइप सिंचाई नेटवर्क: खुली नहरों के बजाय पाइप से सिंचाई की प्लानिंग, जिससे पानी की बर्बादी कम हो।
- ग्राउंडवॉटर असेसमेंट: भू-जल के गिरते स्तर को रोकना और खारेपन की समस्या का समाधान।
- लिफ्ट सिंचाई: ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पानी पहुँचाने की आधुनिक तकनीक।
हिवरे बाजार की ‘अध्ययन यात्रा’: सीखेंगे विकास का मॉडल
इस प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा महाराष्ट्र के अहमद नगर स्थित हिवरे बाजार और कृषि विज्ञान केंद्र, बारामती का दौरा होगा। हिवरे बाजार वही गांव है जिसने जल प्रबंधन के दम पर खुद को सुखाड़ से उबारा और आज वह देश के सबसे समृद्ध गांवों में शुमार है। बिहार के इंजीनियर्स वहां जाकर देखेंगे कि कैसे सामुदायिक भागीदारी और तकनीकी समझ से जलस्तर को ऊपर उठाया जा सकता है।
VOB का नजरिया: काबिल इंजीनियर, समृद्ध बिहार
अक्सर बिहार में सिंचाई योजनाओं के फेल होने की बड़ी वजह पुरानी तकनीक और खराब मैनेजमेंट रही है। पुणे की इस ट्रेनिंग से लौटने के बाद जब ये 20 अभियंता अपने क्षेत्रों में काम करेंगे, तो वे ‘रिमोट सेंसिंग’ और ‘पाइप सिंचाई’ जैसे आधुनिक टूल्स का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह कदम न केवल योजनाओं की लागत कम करेगा, बल्कि उनके स्थायित्व (Stability) को भी सुनिश्चित करेगा। ‘7 निश्चय-2’ के तहत ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ पहुँचाने के लक्ष्य में यह ट्रेनिंग मील का पत्थर साबित हो सकती है।


