- बड़ा लक्ष्य: ‘सात निश्चय-3.0’ के तहत सरकार की नई पहल; जलापूर्ति से जुड़ी शिकायतों का समाधान अब 24 घंटे के भीतर करने का निर्देश।
- इंजीनियरों की क्लास: पटना के ज्ञान भवन में जुटे राज्य भर के सहायक और कनीय अभियंता; सचिव पंकज कुमार पाल ने दी हिदायत- ‘फील्ड में जाएं, सिर्फ कागज पर काम नहीं चलेगा’।
- सख्त चेतावनी: शिकायतों को लटकाने वाले संवेदकों और इंजीनियरों पर होगी कार्रवाई; MIS पोर्टल पर अपडेट करना होगा अनिवार्य।
द वॉयस ऑफ बिहार (पटना)
बिहार में पीने के पानी की समस्या को लेकर अब आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) ने जलापूर्ति से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। विभाग ने लक्ष्य रखा है कि नल-जल योजना या अन्य पेयजल स्रोतों से जुड़ी शिकायतों का समाधान अब 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।
सात निश्चय-3.0 और ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’
शनिवार को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित एक दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभागीय सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘सात निश्चय-3.0’ के तहत ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ (Ease of Living) एक प्रमुख स्तंभ है और पेयजल इसका सबसे संवेदनशील हिस्सा है।
हर महीने करनी होगी जांच
सचिव ने सभी क्षेत्रीय सहायक और कनीय अभियंताओं को सख्त निर्देश दिए हैं:
- फिजिकल वेरिफिकेशन: इंजीनियरों को अपने क्षेत्र की हर जलापूर्ति योजना का महीने में कम से कम एक बार भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) करना होगा।
- डिजिटल एंट्री: निरीक्षण की अद्यतन जानकारी MIS पोर्टल पर डालनी होगी। सचिव ने साफ कहा कि जो डेटा पोर्टल पर नहीं होगा, उसे मान्य नहीं माना जाएगा।
लापरवाही पर गिरेगी गाज
विभाग ने केंद्रीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (CGRC) को और प्रभावी बनाने का फैसला किया है। सचिव ने चेतावनी दी है कि शिकायतों के निपटारे में देरी करने वाले संवेदकों (Contractors) और इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं, अच्छा काम करने वालों को सराहा भी जाएगा।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन विशेष सचिव श्री संजीव कुमार ने किया, जिसमें बिजली बिल भुगतान, पंप चालकों के मानदेय और जल स्रोतों की स्थिरता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
नल-जल योजना बिहार की महत्वाकांक्षी परियोजना है।


