द वॉयस ऑफ बिहार | भागलपुर (20 फरवरी 2026)
महाराष्ट्र के नागपुर स्थित विधान भवन में 14 और 15 फरवरी 2026 को आयोजित राष्ट्रीय पर्यावरणीय युवा संसद में बिहार की मेधा का परचम लहराया है। भागलपुर के छात्र शिव सागर ने इस प्रतिष्ठित मंच पर विपक्षी सांसद की भूमिका निभाते हुए सरकार की विकास नीतियों पर कई गंभीर और तथ्यपूर्ण सवाल खड़े किए।
विक्रमशिला की उपेक्षा पर उठाए सवाल
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के मारवाड़ी महाविद्यालय (राजनीति विज्ञान) के छात्र शिव सागर ने शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त क्षेत्रीय असमानता को प्रमुखता से उठाया:
- ऐतिहासिक अन्याय: उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय के विकास के समानांतर विक्रमशिला विश्वविद्यालय की निरंतर हो रही उपेक्षा को एक बड़ा प्रश्न बताया।
- जवाबदेही की मांग: उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर नैतिक जवाबदेही तय करने का आग्रह किया।
जलवायु परिवर्तन और बिहार के किसान
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक विषयों पर बोलते हुए शिव सागर ने जमीनी हकीकत से दुनिया को रूबरू कराया:
- बाढ़ और सूखा: उन्होंने कहा कि जब तक नीति निर्माण के केंद्र में बिहार के किसानों की समस्याओं—उत्तर बिहार की बाढ़ और दक्षिण बिहार के सूखे—को नहीं रखा जाएगा, तब तक जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक चर्चाएं अधूरी रहेंगी।
- वैश्विक मंच: उन्होंने COP-30 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों का उल्लेख करते हुए स्थानीय समस्याओं के समाधान पर जोर दिया।
“बिहार से गुजरता है सत्ता का मार्ग”
पीरपैंती निवासी शिव सागर ने अपने संबोधन में बिहार की राजनीतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि देश की सत्ता का मार्ग इसी राज्य से होकर गुजरता है, फिर भी विकास की प्राथमिकताओं में इसे अक्सर उपेक्षित छोड़ दिया जाता है।
निष्कर्ष: अपने भाषण के अंत में उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि केवल चुनावी दौरों तक सीमित न रहकर ठोस विकास कार्य किए जाएं और विपक्ष को सहभागी बनाकर ही ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा किया जा सकता है।
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