भारत पर्व में बिहार की झांकी बनी सेल्फी प्वाइंट, मखाना बना राज्य की नई पहचान

नई दिल्ली। लाल किला परिसर में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित छह दिवसीय भारत पर्व महोत्सव का शुक्रवार को समापन हो गया। इस पूरे आयोजन में बिहार की झांकी सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बनी रही।

सुपर फूड मखाना को थीम बनाकर तैयार की गई इस झांकी के सामने दर्शकों की भीड़ लगातार लगी रही। लोग मखाना की झांकी के साथ सेल्फी लेते दिखे और बिहार के इस पारंपरिक उत्पाद को नई पहचान मिलती नजर आई।

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की ओर से आयोजित इस प्रतिष्ठित आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलक देखने को मिली, लेकिन बिहार की झांकी ने स्वास्थ्य, परंपरा और आधुनिक सोच—तीनों का बेहतरीन संगम प्रस्तुत किया।

मिथिला से ग्लोबल सुपरफूड तक

मखाना, जो कभी सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों और घरेलू रसोई तक सीमित था, आज न्यूट्रिशन, मेडिसिन और इंटरनेशनल फूड मार्केट में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।
प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम और मिनरल्स से भरपूर मखाना आज स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवाओं और बुजुर्गों—दोनों की पहली पसंद बन रहा है।

बिहार बना मखाना उत्पादन का गढ़

देश में होने वाले कुल मखाना उत्पादन का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बिहार से आता है।
राज्य के दरभंगा, मधुबनी, कटिहार, अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया जिले इसके प्रमुख केंद्र हैं।

  • वर्ष 2012 में मखाना की खेती लगभग 13 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होती थी।
  • आज यह क्षेत्र बढ़कर 35,224 हेक्टेयर से अधिक हो गया है।
  • उत्पादन अब 56 हजार टन के पार पहुंच चुका है।

सरकार की योजनाओं से बदली तस्वीर

मुख्यमंत्री बागवानी मिशन और मखाना विकास योजना (2019-20) ने किसानों को नई दिशा दी है।
“स्वर्ण वैदेही” और “सबौर मखाना-1” जैसे उन्नत प्रभेदों के प्रयोग से पैदावार और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हुई है।

राजस्व के आंकड़े भी इस बदलाव की कहानी कहते हैं—

  • वर्ष 2005 में मखाना व मत्स्य जलकरों से राज्य को 3.83 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था।
  • 2023-24 में यह बढ़कर 17.52 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड से खुले नए रास्ते

केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के गठन से किसानों और उद्योग को नई ताकत मिलने वाली है।
यह बोर्ड आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग और निर्यात को संगठित करेगा।

दरभंगा को मखाना प्रशिक्षण हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां अब दूसरे राज्यों के किसान भी प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं।

अमेरिका तक पहुंचा बिहार का स्वाद

ग्लूटेन-फ्री, लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण बिहार का मखाना आज अमेरिका समेत कई देशों में लोकप्रिय हो रहा है।
जीआई टैग मिलने से इसकी गुणवत्ता और प्रामाणिकता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

अब मखाना सिर्फ एक पारंपरिक उत्पाद नहीं, बल्कि बिहार की ब्रांड पहचान बन चुका है—जो राज्य को वैश्विक मंच पर गौरव दिला रहा है।

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