पटना।बिहार में वर्षों से लंबित विशेष भूमि सर्वेक्षण अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ शब्दों में कहा है कि अब ढिलाई नहीं चलेगी और हर हाल में यह सर्वेक्षण अगले दो वर्षों में पूरा किया जाएगा।
मंगलवार को विभागीय समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर जिले से समय-सीमा आधारित कार्य योजना और प्रगति रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि यह सर्वे औपचारिकता नहीं, बल्कि भूमि विवादों के स्थायी समाधान का आधार बनेगा।
‘सर्वे का मतलब सिर्फ आंकड़े नहीं, जनता को न्याय’
उपमुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि—
- गलत रिपोर्टिंग
- जानबूझकर देरी
- या लापरवाही
पाई गई तो संबंधित अधिकारियों पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई होगी।
उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि यदि सर्वे के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी हो तो लिखित शिकायत करें, ताकि तुरंत कार्रवाई की जा सके।
क्यों पिछड़ा सर्वे?
भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशक सुहर्ष भगत ने बताया कि—
- तकनीकी मार्गदर्शिका 2019 में बनी
- कर्मियों की नियुक्ति में देरी हुई
- फील्ड में जमीनी विवादों से काम धीमा पड़ा
इसी कारण 2011 में शुरू हुआ सर्वे कई सालों तक अधूरा रह गया।
अब तक की प्रगति
प्रथम चरण (20 जिले, 89 अंचल)
- 5657 राजस्व गांवों में ग्राम सभा व ऑथोफोटो कार्य पूरा
- खानापुरी 94.4%
- प्रपत्र-6 का कार्य 79%
- 67% गांवों में प्रारूप अधिकार पत्र प्रकाशित
- 31% गांवों में अंतिम अधिकार पत्र जारी
- 912 गांवों के अभिलेख अधिसूचित
द्वितीय चरण (36 जिले, 444 अंचल)
- 37,419 गांवों में हवाई सर्वे और ग्राम सभा पूरी
- 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त
- 98.81% गांवों में प्रपत्र-5 कार्य पूर्ण
- त्रि-सीमाना निर्धारण और सीमा सत्यापन जारी
अधिकारियों को निर्देश
बैठक में प्रधान सचिव सी.के. अनिल और सचिव जय सिंह ने बताया कि नया सर्वे पुराने कैडेस्ट्रल और रिवीजनल सर्वे से कहीं अधिक पारदर्शी और तकनीकी होगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अब जमीन से जुड़ा हर विवाद डिजिटल और कानूनी रूप से स्पष्ट होगा।
साफ संदेश:
अब सर्वे कागजों तक सीमित नहीं रहेगा—यह बिहार में भूमि विवादों के अंत का रास्ता बनेगा।


