
HIGHLIGHTS
- रिकॉर्ड सफर: होली-ईद के मौके पर 18 दिनों में 43,000 से अधिक यात्रियों ने चुनी सरकारी बस सेवा।
- टॉप रूट: मुजफ्फरपुर-दिल्ली रूट बना सबसे बिजी; अकेले 17 हजार से ज्यादा लोगों ने की यात्रा।
- 93% ऑक्यूपेंसी: ट्रेनों में लंबी वेटिंग के बीच BSRTC की बसों में लगभग सभी सीटें रहीं फुल।
- सुविधा: 118 एसी सीटर और स्लीपर बसों का बेड़ा; 23 मार्च तक जारी रहेगी यह विशेष सेवा।
पटना | 14 मार्च, 2026
होली और ईद के त्योहार पर घर लौटने वाले प्रवासी बिहारियों के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की विशेष बसें ‘संकटमोचक’ साबित हो रही हैं। ट्रेनों में महीनों पहले खत्म हुई जगह और भारी भीड़ के बीच, सरकार की यह पहल प्रवासियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर का विकल्प दे रही है। पिछले 18 दिनों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि प्रवासियों ने निजी माफियाओं के महंगे टिकटों के बजाय सरकारी एसी बसों पर जबरदस्त भरोसा जताया है।
मुजफ्फरपुर-दिल्ली रूट पर सबसे ज्यादा ‘क्रेज’, ट्रेनों का बना विकल्प
निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा भीड़ मुजफ्फरपुर और दिल्ली के बीच देखी गई, जहाँ 17,478 यात्रियों ने सफर किया। वहीं दरभंगा, गया और पूर्णिया से दिल्ली-गुरुग्राम जाने वाले यात्रियों की संख्या भी हजारों में रही।
- गया-दिल्ली/गुरुग्राम: 3,700+ यात्री
- दरभंगा-गुरुग्राम: 4,200+ यात्री
- पटना-दिल्ली: 3,200+ यात्री
- पूर्णिया-गुरुग्राम: 3,100+ यात्री
कुल 118 एसी बसों का यह बेड़ा दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और झारखंड के प्रमुख शहरों को बिहार से जोड़ रहा है।
डिजिटल बुकिंग और कंफर्ट: जेब पर भी नहीं पड़ा बोझ
निगम ने इस बार यात्रा को हाई-टेक और आसान बनाने पर जोर दिया है। यात्री घर बैठे https://bsrtc.bihar.gov.in/ पर जाकर अपनी पसंद की सीट चुन सकते हैं। साथ ही बसों में यूपीआई (UPI), डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग के जरिए भुगतान की सुविधा ने सफर को कैशलेस और झंझट मुक्त बना दिया है। एसी सीटर और स्लीपर की सुविधा के कारण लंबी दूरी के यात्रियों को थकान का अहसास भी कम हो रहा है।
VOB का नजरिया: ‘निजी बस माफिया’ पर सरकारी चोट?
अक्सर त्योहारों के समय निजी बस संचालक प्रवासियों से मनमाना किराया वसूलते हैं। बिहार सरकार की यह समयबद्ध पहल उन माफियाओं पर एक कड़ी चोट है। 93 प्रतिशत सीटों का फुल रहना यह साबित करता है कि अगर सरकार सुविधाएं दे, तो जनता सरकारी व्यवस्था पर ही भरोसा करेगी। हालांकि, 23 मार्च के बाद भी कुछ चुनिंदा रूट्स (जैसे दिल्ली-मुजफ्फरपुर) पर इन बसों को नियमित करने की जरूरत है, क्योंकि इन रूट्स पर साल भर भारी दबाव रहता है। ‘समृद्धि यात्रा’ के दौर में प्रवासियों की यह सुगम घर वापसी बिहार के बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर की एक सुखद तस्वीर है।


