भोजपुर, 16 मार्च 2026: जन सुराज अभियान के सूत्रधार ने रविवार को भोजपुर में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में राज्यसभा चुनाव और बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव से बिहार की आम जनता की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आने वाला है, क्योंकि यहां चुने जाने वाले प्रतिनिधियों की राजनीतिक ताकत इतनी सीमित है कि वे अपने क्षेत्र के लिए एक ट्रेन का ठहराव तक सुनिश्चित नहीं करा पाते।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की राजनीति वर्षों से ऐसी दिशा में चली गई है जहां जनता की बुनियादी समस्याओं पर गंभीर चर्चा नहीं होती। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों को संसद भेजा जाता है, वे अपने राज्य के विकास से जुड़े छोटे-छोटे फैसले भी प्रभावी ढंग से नहीं करवा पाते।
उन्होंने बिहार और गुजरात की तुलना करते हुए कहा कि दोनों राज्यों की राजनीतिक ताकत और आर्थिक स्थिति में बड़ा अंतर है। किशोर ने कहा कि गुजरात से 26 सांसद संसद में जाते हैं, लेकिन वहां के लोग बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों और उद्योगों के मालिक हैं। वहीं बिहार से 40 सांसद संसद में होने के बावजूद यहां के लाखों लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर हैं। उनके अनुसार यह अंतर सिर्फ संसाधनों का नहीं बल्कि राजनीतिक सोच और विकास मॉडल का परिणाम है।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने हाल ही में हुए चुनावों पर भी सवाल उठाए। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि बिहार में हुए चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिहाज से बेहद असामान्य रहे। उनका दावा था कि पहली बार ऐसा हुआ जब सरकार ने खुले तौर पर सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कर चुनाव को प्रभावित किया और बड़े पैमाने पर पैसे बांटकर वोट खरीदने की कोशिश की गई।
किशोर ने कहा कि उनके पास लगातार ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हजारों की संख्या में वोटरों को आर्थिक प्रलोभन देकर प्रभावित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 60 से 70 हजार वोट पैसे के दम पर जुटाए गए, जो लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बिहार की राजनीति में जवाबदेही और विकास को केंद्र में नहीं रखा जाएगा, तब तक राज्य की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव संभव नहीं है। प्रशांत किशोर ने लोगों से अपील की कि वे सिर्फ चुनावी वादों के आधार पर नहीं बल्कि विकास और पारदर्शिता के मुद्दों पर नेताओं से सवाल पूछें।
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में जन सुराज अभियान बिहार की राजनीति में एक वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था खड़ी करने की दिशा में काम करेगा, ताकि राज्य के युवाओं और आम लोगों को बेहतर अवसर मिल सकें।


