20 साल में बिहार की सड़क क्रांति: गांव-गांव जुड़ा बारहमासी सड़कों से

पटना, 27 सितंबर।पिछले दो दशकों में बिहार ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में ऐतिहासिक छलांग लगाई है। कभी जहां बारिश होते ही गांवों का संपर्क टूट जाता था, वहीं आज राज्य के 1 लाख 20 हजार से अधिक ग्रामीण बसावटें बारहमासी सड़कों से जुड़ चुकी हैं। इस सड़क क्रांति ने न सिर्फ परिवहन को आसान बनाया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन को भी नई रफ्तार दी है।


सड़क नेटवर्क में ऐतिहासिक विस्तार

  • 20 वर्षों में 1 लाख 19 हजार कि.मी. ग्रामीण सड़कें बनीं
  • 8,000 कि.मी. से बढ़कर नेटवर्क अब 1.19 लाख कि.मी.
  • अब तक 2,560 पुलों का निर्माण
  • फिलहाल 12,500 नई सड़कें और 1,791 पुल निर्माणाधीन

गांवों को मिला विकास का नया मार्ग

ग्रामीण सड़कों ने गांव-गांव के बीच की दूरी खत्म कर दी है। अब किसान अपने उत्पाद सीधे शहरों के बाजार तक ले जा रहे हैं और उन्हें बेहतर मूल्य मिल रहा है। स्कूल-कॉलेज, अस्पताल और रोजगार तक पहुंच आसान हो गई है।

ग्रामीण कार्य विभाग के मुताबिक ग्रामीण पथ अनुरक्षण नीति-2018 के तहत 36,894 कि.मी. सड़कों का अनुरक्षण भी किया गया है, जिससे लंबे समय तक सड़कें बेहतर बनी रहें।


आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

  • सड़कों से ग्रामीण उद्योगों को शहरों के बाजार से सीधा संपर्क मिला।
  • पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
  • नए उद्योगों और व्यापार को बढ़ावा मिला।
  • ग्रामीण क्षेत्रों की प्रति व्यक्ति आय में 700% से अधिक वृद्धि दर्ज हुई।

सड़क क्रांति का असर

आज बिहार के गांव हर मौसम में सुगमता से जुड़े हैं। यही वजह है कि सड़कें अब सिर्फ परिवहन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी हैं।


 

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