‘मीठा’ होगा बिहार का भविष्य! ईखायुक्त अनिल झा ने गांधी मैदान में परखी गन्ना उद्योग की चमक; हसनपुर चीनी मिल की ‘सब्सिडी’ वाली खेती बनी मिसाल

HIGHLIGHTS: 114वें ‘बिहार दिवस’ पर गन्ने की मिठास और तकनीक का संगम; अन्नदाता को ‘स्मार्ट किसान’ बनाने की तैयारी

  • खास दौरा: ईखायुक्त श्री अनिल कुमार झा ने रविवार को गांधी मैदान में गन्ना उद्योग विभाग के पवेलियन का गहन निरीक्षण किया।
  • बड़ी सराहना: हसनपुर चीनी मिल द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही अनुदानित (Subsidy) योजनाओं को ईखायुक्त ने बताया ‘गेम चेंजर’।
  • स्मार्ट खेती: उन्नत कृषि तकनीक और गन्ना उत्पादन की आधुनिक जानकारियों से लैस स्टॉल्स ने खींचा किसानों का ध्यान।
  • लक्ष्य: लागत कम करना और पैदावार बढ़ाना; ताकि बिहार का गन्ना किसान आर्थिक रूप से ‘आत्मनिर्भर’ बन सके।
  • टीम वर्क: हसनपुर चीनी मिल के अधिकारी दीपक कुमार चौधरी और राज चंद्रा ने टिकाऊ खेती के लिए दोहराई अपनी प्रतिबद्धता।

पटना | 22 मार्च, 2026

​बिहार की धरती पर ‘श्वेत क्रांति’ और ‘हरित क्रांति’ के बाद अब ‘मीठी क्रांति’ की लहर तेज हो रही है। 114वें बिहार दिवस के अवसर पर पटना के गांधी मैदान में सजे गन्ना उद्योग विभाग के पवेलियन ने यह साबित कर दिया कि बिहार का गन्ना किसान अब पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। रविवार को ईखायुक्त श्री अनिल कुमार झा ने खुद मैदान में उतरकर विभाग की प्रदर्शनियों का जायजा लिया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस बार का फोकस केवल गन्ने की पैदावार पर नहीं, बल्कि ‘खेत से चीनी मिल तक’ के सफर को किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बनाने पर है।

हसनपुर चीनी मिल का ‘अनुदान मॉडल’: क्यों है खास?

​निरीक्षण के दौरान ईखायुक्त ने हसनपुर चीनी मिल के स्टॉल पर काफी समय बिताया। उन्होंने मिल द्वारा किसानों को दी जा रही सब्सिडी और तकनीकी सहयोग की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

​”हसनपुर चीनी मिल जैसी पहल अन्य मिलों के लिए भी प्रेरणा है। जब किसानों को समय पर अनुदान और आधुनिक बीज मिलते हैं, तो न केवल उनकी लागत कम होती है, बल्कि उत्पादन में भी भारी उछाल आता है। यह मॉडल बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।” — श्री अनिल कुमार झा, ईखायुक्त

 

तकनीक का ‘सरल’ प्रदर्शन: किसानों को जागरूक करने की मुहिम

​गन्ना उद्योग विभाग के पवेलियन में तकनीकी जानकारियों को इतने सरल तरीके से प्रदर्शित किया गया है कि कम पढ़े-लिखे किसान भी ‘टिकाऊ खेती’ के गुर आसानी से समझ रहे हैं।

  • उन्नत बीज: कम पानी में अधिक पैदावार देने वाले गन्ने की किस्मों की प्रदर्शनी।
  • आधुनिक प्रबंधन: बुवाई से लेकर कटाई तक की मशीनों और खाद प्रबंधन की लाइव जानकारी।
  • सरकारी योजनाएं: विभाग द्वारा किसानों को दिए जाने वाले वित्तीय लाभों का स्पष्ट चार्ट।

​हसनपुर चीनी मिल के अधिकारी श्री दीपक कुमार चौधरी और राज चंद्रा ने ईखायुक्त को भरोसा दिलाया कि उनका मिल प्रबंधन किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और बेहतर प्रबंधन के जरिए गन्ने की खेती को ‘टिकाऊ’ बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

VOB का नजरिया: क्या ‘चीनी’ बदलेगी बिहार के किसानों की तकदीर?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि ‘उन्नत बिहार’ के सपने में गन्ना उद्योग एक रीढ़ की हड्डी की तरह है।

  1. नकद फसल का जादू: गन्ना बिहार के किसानों के लिए एक भरोसेमंद ‘कैश क्रॉप’ (नकद फसल) है। अगर इसे मिलों का सही सहयोग मिले, तो पलायन रोकने में बड़ी मदद मिल सकती है।
  2. चीनी मिलों की जवाबदेही: हसनपुर चीनी मिल की सराहना यह दर्शाती है कि जब उद्योग और किसान मिलकर काम करते हैं, तो परिणाम सुखद होते हैं।
  3. पेमेंट की सुगमता: ईखायुक्त का इस तरह सक्रिय होना यह संदेश देता है कि सरकार गन्ने के भुगतान और प्रबंधन को लेकर गंभीर है, जो किसानों का भरोसा जीतने के लिए जरूरी है।

निष्कर्ष: सुशासन और ‘मिठास’ का बेजोड़ संगम

​114वें बिहार दिवस पर गांधी मैदान का यह पवेलियन यह गवाही दे रहा है कि बिहार की मिट्टी में संघर्ष की जो क्षमता है, वह अब सही दिशा में मोड़ दी गई है। ईखायुक्त की मुस्तैदी और मिलों के सहयोग से उम्मीद है कि आने वाले समय में बिहार का गन्ना उद्योग राष्ट्रीय स्तर पर अपनी नई पहचान बनाएगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ सभी प्रगतिशील किसानों को बिहार दिवस की शुभकामनाएं देता है।

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