पटना, 9 अगस्त।बिहार में बिजली का इतिहास 20 सालों में नए सुनहरे अध्याय लिख चुका है। 2005 से पहले जहां पूरे राज्य की बिजली खपत सिर्फ 700 मेगावाट थी, वहीं आज यह बढ़कर 8,752 मेगावाट हो गई है। यह 12 गुना से भी ज्यादा की वृद्धि है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिजली अब विकास का सबसे बड़ा इंजन बन चुकी है — इतना कि आज आम उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल रही है।
बिजली उपभोक्ताओं की बाढ़
20 साल पहले राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 17 लाख 30 हजार थी, जो अब बढ़कर 1 करोड़ 86 लाख हो गई है। इसका मतलब है—अब लगभग हर घर तक बिजली का कनेक्शन है।
प्रति व्यक्ति खपत में चौगुनी छलांग
2005 में बिहार का प्रति व्यक्ति बिजली खपत मात्र 75 यूनिट थी, जो अब 363 यूनिट तक पहुँच चुकी है।
- मुख्य कारण: गांव-गांव तक विद्युतीकरण, शहरों में तेज रफ्तार कनेक्शन, और उद्योगों की स्थापना।
- हर घर बिजली योजना (2018): इस योजना ने तय कर दिया कि कोई भी घर अंधेरे में न रहे।
बिजली सप्लाई का नया रिकॉर्ड
कभी बिहार में 8-10 घंटे बिजली मिलना भी मुश्किल था, आज
- शहरी इलाकों में सप्लाई: 22–24 घंटे
- ग्रामीण इलाकों में सप्लाई: 18–20 घंटे
तकनीकी नुकसान में ऐतिहासिक कमी
20 साल पहले एटी एवं सी नुकसान (तकनीकी और वाणिज्यिक हानि) 59% थी, जो अब घटकर 15.50% हो गई है।
- पुराने तारों और उपकरणों की जगह आधुनिक केबल और सिस्टम लगाए गए।
- ग्रिड और पावर सब-स्टेशन की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ।
बुनियादी ढांचे में क्रांति
- पावर सब-स्टेशन: 172 → 1,260 (4 गुना वृद्धि)
- ट्रांसफॉर्मर: 35,000 → 3.5 लाख (10 गुना वृद्धि)
- ट्रांसमिशन लाइन: 5,000 किमी → 20,000+ किमी (4 गुना वृद्धि)
- 33 केवी लाइन: 6,000 किमी → 19,000 किमी (3 गुना वृद्धि)
आर्थिक और औद्योगिक विकास को मिला पावर बूस्ट
बिजली की भरपूर उपलब्धता का असर सीधे बिहार की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।
- पहले जहां सूई तक का कारखाना नहीं था, आज सैकड़ों उद्योग फल-फूल रहे हैं।
- औद्योगिक पार्क और लघु-मध्यम उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं।
- गांव-गांव तक आधुनिक सुविधाएं पहुँच रही हैं और जीवन स्तर में जबरदस्त सुधार आया है।


