HIGHLIGHTS: नीति और नीयत का असर, बदल रहा है बिहार का ‘स्कोरकार्ड’
- बड़ी उपलब्धि: बिहार का SDG स्कोर 2018 के 48 से बढ़कर 2023-24 में 57 हुआ।
- गरीबी पर प्रहार: राज्य ने बहुआयामी गरीबी से 2.25 करोड़ लोगों को बाहर निकाला।
- जल में अव्वल: ‘स्वच्छ जल एवं स्वच्छता’ (SDG-6) में 98 अंकों के साथ बिहार देश में तीसरे नंबर पर।
- नारी शक्ति: महिला श्रम बल भागीदारी (LFPR) 4% से बढ़कर सीधे 32% पर पहुंची।
- आर्थिक रफ्तार: 2024-25 में बिहार की GSDP वृद्धि दर 13.1% रही, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।
पटना | 19 मार्च, 2026
बिहार अब केवल ‘संभावनाओं’ का प्रदेश नहीं, बल्कि ‘परिणामों’ का प्रदेश बनता दिख रहा है। राजधानी पटना में आयोजित सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन सत्र में योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने जो आंकड़े पेश किए, वे राज्य की बदलती तस्वीर की गवाही दे रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बिहार ने समावेशी और संतुलित विकास की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमानी शुरू कर दी है।
📊 बिहार का ‘प्रगति कार्ड’: 2018 बनाम 2024-25
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मुख्य संकेतक (Indicators) |
स्थिति (2018/17) |
वर्तमान स्थिति (2023-24/25) |
सुधार/असर |
|---|---|---|---|
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SDG समग्र स्कोर |
48 |
57 |
9 अंकों का सुधार |
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महिला श्रम भागीदारी (LFPR) |
~4% |
32% |
8 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि |
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GSDP वृद्धि दर |
– |
13.1% |
राष्ट्रीय औसत से तेज |
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स्वच्छ जल (SDG-6) रैंक |
– |
देश में तीसरा (Score 98) |
‘नल का जल’ का असर |
“डेटा आधारित योजनाएं ही बिहार का भविष्य” — डॉ. एन. विजयलक्ष्मी
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव ने बिहार की रणनीति का खुलासा किया:
- साक्ष्य-आधारित नीति: बिहार अब 334 संकेतकों के माध्यम से योजनाओं की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है।
- महिला सशक्तिकरण: जीविका और मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना ने ग्रामीण महिलाओं की किस्मत बदली है। महिलाओं की वित्तीय भागीदारी अब केवल कागजों पर नहीं, धरातल पर है।
- गरीबी उन्मूलन: 2.25 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से ऊपर आना राज्य के लिए अब तक की सबसे बड़ी सामाजिक जीत है।
VOB का नजरिया: क्या ‘आंकड़ों का उजाला’ हर घर तक पहुंचा?
योजना एवं विकास विभाग की यह रिपोर्ट सुखद है, खासकर महिला श्रम भागीदारी में 4% से 32% का उछाल बिहार की बदलती सामाजिक सोच को दर्शाता है। 13.1% की GSDP ग्रोथ रेट यह साबित करती है कि बिहार की अर्थव्यवस्था ‘इंजन’ की तरह दौड़ रही है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि SDG-6 (स्वच्छ जल) में देश में तीसरा स्थान पाना ‘सात निश्चय’ की सफलता पर मुहर है। हालांकि, चुनौती अभी भी उन 8 लक्ष्यों को प्राप्त करने की है जहाँ काम बाकी है। भविष्य में ‘जेंडर बजटिंग’ को और प्रभावी बनाना होगा ताकि यह विकास ‘बैलेंस्ड’ रहे।


