बिहार की ‘बेटी’ का दिल्ली में हौसला: आनंद विहार मेट्रो स्टेशन पर टिकट क्लर्क की धोखाधड़ी पकड़ी; वीडियो वायरल होते ही रेलवे ने कर्मचारी को किया सस्पेंड

नई दिल्ली/पटना | 27 फरवरी, 2026: जब जागरूकता और साहस हाथ मिलाते हैं, तो बड़े से बड़ा सिस्टम भी झुकने पर मजबूर हो जाता है। दिल्ली के आनंद विहार मेट्रो स्टेशन पर बिहार की एक साधारण महिला मजदूर ने अपनी हिम्मत से यह साबित कर दिया है कि हक की आवाज उठाना कभी बेकार नहीं जाता। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने न केवल एक बेईमान कर्मचारी का चेहरा बेनकाब किया, बल्कि रेलवे प्रशासन को भी त्वरित कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया।

200 रुपये की ‘चोरी’ और महिला की सजगता

​घटना आनंद विहार मेट्रो स्टेशन के रेलवे टिकट काउंटर की है। पीड़िता, जो बिहार की रहने वाली है और मजदूरी करती है, टिकट लेने काउंटर पर पहुँची थी।

  • धोखाधड़ी का खेल: महिला ने क्लर्क को 1,000 रुपये का नोट दिया। क्लर्क ने उसे टिकट भी नहीं दिया और वापस केवल 800 रुपये लौटाए।
  • पहचान और विरोध: जैसे ही महिला को अहसास हुआ कि उसके 200 रुपये काट लिए गए हैं, उसने शोर मचाने के बजाय मोबाइल निकाला और वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो में वह साफ कहती है, “मैं बिहार से आई हूँ, गरीब मजदूर हूँ। अकेले देखकर मुझे कमजोर समझा गया।”

पुलिस से निराशा, सोशल मीडिया से न्याय

​महिला ने बताया कि उसने मदद के लिए 112 नंबर पर कॉल किया था, लेकिन उसे तत्काल कोई सहायता नहीं मिली।

  1. डिजिटल क्रांति: महिला ने हार नहीं मानी और वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।
  2. नागरिक एकजुटता: देखते ही देखते वीडियो वायरल हो गया। हजारों लोगों ने इसे उत्तर रेलवे (Northern Railway) को टैग किया और भ्रष्ट कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

रेलवे का एक्शन: क्लर्क तत्काल प्रभाव से सस्पेंड

​सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव और पुख्ता सबूत (वीडियो) को देखते हुए दिल्ली डिवीजन, उत्तर रेलवे हरकत में आया।

  • पहचान: वीडियो के आधार पर संबंधित बुकिंग क्लर्क की शिनाख्त की गई।
  • सजा: रेलवे ने क्लर्क को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है। साथ ही उसके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक जांच भी शुरू कर दी गई है।

VOB का नजरिया: डरिए नहीं, वीडियो बनाइए!

अक्सर बाहरी राज्यों में बिहार के मजदूरों को भाषाई या आर्थिक आधार पर कमजोर समझकर उनके साथ ऐसी धोखाधड़ी की जाती है। इस महिला यात्री ने जो किया, वह हर उस नागरिक के लिए मिसाल है जो अन्याय सहता है। पुलिस की नाकामी के बावजूद सोशल मीडिया ने उसे न्याय दिलाया। यह घटना याद दिलाती है कि आपका स्मार्टफोन केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि आपके अधिकारों की रक्षा का एक शक्तिशाली हथियार भी है।

​”अकेली महिला और प्रवासी मजदूर को ‘सॉफ्ट टारगेट’ समझने वाले भ्रष्ट कर्मियों के लिए यह सस्पेंशन एक कड़ा सबक है।”

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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