बिहार की ‘10 हजारी योजना’ दूसरे चरण में करेगी प्रवेश, महिलाओं को मिल सकते हैं 2.10 लाख रुपये तक

पटना: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना, जिसे आमतौर पर ‘10 हजारी योजना’ कहा जाता है, राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को बिना वापसी की शर्त के 10 हजार रुपये की प्रारंभिक सहायता दी जा रही है, जिससे वे छोटा रोजगार शुरू कर सकें। अब यह योजना अपने दूसरे चरण में प्रवेश करने जा रही है, जहां सफल लाभार्थियों को अधिकतम 2.10 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।

जीविका के माध्यम से लागू हो रही योजना

इस योजना का क्रियान्वयन जीविका (बिहार राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) द्वारा किया जा रहा है। इसका लाभ ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को मिल रहा है। जीविका अधिकारियों के अनुसार, योजना के संभावित लाभार्थियों की संख्या करीब दो करोड़ तक हो सकती है।

अब तक 1.90 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें से 1.44 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की राशि का भुगतान किया जा चुका है।

आवेदन की समयसीमा और बढ़ती भागीदारी

10 हजारी योजना के तहत आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाई गई थी। सिर्फ दिसंबर महीने में ही 23 लाख से अधिक नए आवेदन प्राप्त हुए। पात्रता जांच के बाद इन महिलाओं को भी जल्द राशि का भुगतान किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि पहली किस्त के रूप में मिलने वाले 10 हजार रुपये अनुदान हैं, जिन्हें वापस नहीं करना होता।

दूसरा चरण: मूल्यांकन के बाद मिलेगी बड़ी राशि

योजना का असली असर इसके दूसरे चरण में दिखेगा। पहली किस्त से शुरू किए गए रोजगार—जैसे छोटी दुकान, सिलाई-कढ़ाई, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण या अन्य स्वरोजगार—का मैदानी सर्वे और मूल्यांकन किया जाएगा। जिन महिलाओं का कार्य आगे बढ़ाने योग्य पाया जाएगा, उन्हें कार्य की क्षमता और संभावनाओं के अनुसार अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस चरण में 2.10 लाख रुपये तक की सहायता देने की घोषणा की है, लेकिन यह राशि सभी लाभार्थियों को समान रूप से नहीं मिलेगी। जीविका द्वारा तय मानकों के आधार पर ही राशि निर्धारित की जाएगी। यह अतिरिक्त सहायता वापसी की शर्त के साथ होगी, ताकि कारोबार को स्थायी रूप से आगे बढ़ाया जा सके। भुगतान और वापसी की प्रक्रिया को लेकर नियमावली तैयार की जा रही है।

शहरी क्षेत्रों में तकनीकी अड़चन

योजना की शुरुआत में यह केवल ग्रामीण महिलाओं तक सीमित थी, लेकिन बाद में शहरी महिलाओं को भी इसमें शामिल किया गया। शहरी क्षेत्रों से अब तक 18 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, हालांकि तकनीकी कारणों से वहां पहली किस्त का भुगतान अभी शुरू नहीं हो सका है।

इसी दौरान तकनीकी गड़बड़ी के कारण 470 दिव्यांग पुरुषों के खातों में भी 10 हजार रुपये ट्रांसफर हो गए। जीविका सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही है। चूंकि उनके परिवार की महिलाओं ने भी आवेदन किया है, पात्रता की स्थिति में राशि को समायोजित कर लिया जाएगा।

दो करोड़ महिलाएं हो सकती हैं वास्तविक लाभार्थी

बिहार में कुल करीब 2.7 करोड़ परिवार हैं, जिनमें से लगभग 21 लाख परिवार करदाता हैं। इसके अलावा सरकारी सेवक और शहरी क्षेत्रों के कई परिवार इस योजना के दायरे में नहीं आते। इसी आधार पर जीविका का आकलन है कि लगभग दो करोड़ महिलाएं इस योजना की वास्तविक लाभार्थी हो सकती हैं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार और उद्यमिता की ओर प्रेरित करना है। पहले चरण में जहां महिलाओं को शुरुआती संबल मिला है, वहीं दूसरा चरण उन्हें सफल उद्यमी बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।

यदि योजना अपने निर्धारित लक्ष्यों पर खरी उतरती है, तो यह बिहार में महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन की एक मिसाल बन सकती है।


 

  • Related Posts

    फॉर्मर आईडी पर सदन में गरमाया मामला, मंत्री बोले—किसी किसान का लाभ नहीं रुका

    Share Add as a preferred…

    Continue reading