
पटना। बिहार की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में ‘अधिप्राप्ति’ (Procurement) की प्रक्रिया को एक मजबूत और पारदर्शी आधार देने के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अब पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। रबी विपणन मौसम 2026-27 के दौरान किसानों को उनके पसीने की सही कीमत दिलाने और सरकारी अनाज भंडारों को समृद्ध करने के उद्देश्य से विभाग ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। राजधानी पटना में गुरुवार, 07 मई 2026 को विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु “रबी विपणन मौसम 2026-27” के तहत गेहूं और मसूर की अधिप्राप्ति में तेजी लाना तथा “खरीफ विपणन मौसम 2025-26” के लंबित सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की प्राप्ति को समय पर पूरा करना रहा। सचिव ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अधिप्राप्ति प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का एक भी पात्र किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लाभ से वंचित न रहे और अधिप्राप्ति का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे हर हाल में समय सीमा के भीतर प्राप्त किया जाए।
विपणन चक्र की सघन समीक्षा: सचिव के कड़े तेवर
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सभागार में आयोजित इस मैराथन बैठक में सचिव अभय कुमार सिंह ने अधिप्राप्ति से जुड़ी हर छोटी-बड़ी कड़ी का विश्लेषण किया। बैठक में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक सुनील कुमार और विभाग के विशेष सचिव विभूति रंजन चौधरी सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा, भारतीय खाद्य निगम (FCI), नेफेड (NAFED), एनसीसीएफ (NCCF) और सभी जिलों के जिला सहकारिता पदाधिकारी (DCO) व जिला प्रबंधक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस संवाद का हिस्सा बने।
सचिव ने सबसे पहले खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के तहत सीएमआर चावल की प्राप्ति की स्थिति जांची। उन्होंने निर्देश दिया कि चावल प्राप्ति के कार्य में तेजी लाई जाए ताकि मिलरों और गोदामों के बीच का चक्र सुचारू रूप से चलता रहे। इसके तुरंत बाद, मुख्य चर्चा रबी फसलों की ओर मुड़ी। अभय कुमार सिंह ने रबी विपणन मौसम 2026-27 के तहत संचालित ‘विकेंद्रीकृत अधिप्राप्ति योजना’ और ‘प्राइस सपोर्ट स्कीम’ की प्रगति पर असंतोष व्यक्त करते हुए कार्यशैली में सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गेहूं और मसूर की खरीद की रफ़्तार को वर्तमान गति से कई गुना बढ़ाना होगा।
पैक्स और व्यापार मंडलों की भूमिका: जमीनी स्तर पर सक्रियता का आदेश
बिहार में अधिप्राप्ति की सफलता की असली चाबी पैक्स (PACS) और व्यापार मंडलों के पास होती है। सचिव ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिया कि जिलों में अधिप्राप्ति कार्य के लिए योग्य सभी समितियों को तत्काल प्रभाव से सक्रिय किया जाए। उन्होंने यह भी साफ किया कि केवल समितियों को खोल देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक सक्रिय पैक्स और व्यापार मंडल के लिए गेहूं अधिप्राप्ति का एक निश्चित लक्ष्य निर्धारित किया जाना चाहिए।


