
पटना/भागलपुर। बिहार के मौसम ने एक बार फिर करवट बदली है, लेकिन यह बदलाव पूरे राज्य के लिए एक समान राहत लेकर नहीं आया है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं ने राज्य में ‘काल बैसाखी’ (Nor’wester) जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिसके कारण बिहार का भूगोल अब दो अलग-अलग मौसमी मिजाजों में बंट गया है। जहां एक ओर उत्तर और पूर्वी बिहार के जिलों में मेघ गर्जन और बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, वहीं दक्षिण और मध्य बिहार के जिले अब भी सूरज की तपिश और भीषण गर्मी की आग में झुलस रहे हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने रविवार, 26 अप्रैल 2026 को राज्य के 19 जिलों के लिए ‘ऑरण्ज अलर्ट’ जारी किया है, जिसमें धूल भरी आंधी और आकाशीय बिजली गिरने की गंभीर चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हवा की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है, जो जनजीवन और फसलों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
‘काल बैसाखी’ का प्रभाव: क्यों बदला अचानक मिजाज?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी के कारण धरातल का तापमान काफी बढ़ गया था। इसी बीच बंगाल की खाड़ी से नमी युक्त हवाओं का प्रवेश बिहार के वायुमंडल में हुआ है। जब अत्यधिक गर्मी और नमी का मिलन होता है, तो ‘काल बैसाखी’ की स्थिति बनती है। यह स्थिति विशेष रूप से अप्रैल और मई के महीने में देखी जाती है, जहाँ अचानक काले बादल छाते हैं और तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश होती है।
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 4 से 5 दिनों तक बिहार के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ठनका (आकाशीय बिजली) गिरने की प्रबल आशंका है। यह मौसमी सिस्टम फिलहाल उत्तर बिहार और सीमांचल के इलाकों में अधिक सक्रिय दिख रहा है, लेकिन इसका असर धीरे-धीरे मध्य बिहार की ओर भी बढ़ने की उम्मीद है।
19 जिलों में ऑरेंज अलर्ट: आंधी और वज्रपात की चेतावनी
रविवार को जिन 19 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, वहां रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इन जिलों में धूल भरी आंधी चलने की संभावना है, जिसकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने का अनुमान है। इस दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जो जान-माल के लिए घातक हो सकती हैं।
शनिवार की शाम से ही मौसम के इस बदले रूप का असर दिखने लगा था। सुपौल, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, अररिया, मधेपुरा और मधुबनी जैसे जिलों में शाम को अचानक घने बादल छा गए। सुपौल, किशनगंज और मधुबनी में न केवल तेज बारिश हुई, बल्कि ओले (Hailstorm) भी गिरे, जिससे तापमान में एकाएक गिरावट दर्ज की गई। मुजफ्फरपुर में भी धूल भरी आंधी और बादलों की आवाजाही से लोगों को उमस भरी गर्मी से तात्कालिक राहत मिली है।
बिहार में मौसम के दो रूप: उत्तर में राहत, दक्षिण में ‘आग’
बिहार वर्तमान में मौसम के दो चरम छोरों पर खड़ा है। एक तरफ जहां उत्तर और पूर्वी बिहार के जिलों में बारिश के कारण मौसम सुहावना बना हुआ है, वहीं दक्षिण-मध्य बिहार के जिलों में फिलहाल राहत के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। पटना, गया, रोहतास और बक्सर जैसे जिलों में लू (Heatwave) जैसी स्थिति बनी हुई है।
इन जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर बना रहने की संभावना है। दक्षिण बिहार के इन इलाकों में फिलहाल बारिश के कोई पुख्ता संकेत नहीं मिले हैं, जिससे यहाँ के निवासियों को भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि ‘काल बैसाखी’ का असर धीरे-धीरे पटना तक पहुँचने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी पटना में सोमवार से मौसम बदल सकता है, जहाँ हल्की बारिश और तेज हवा चलने से तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।
सुरक्षा के उपाय और कृषि पर प्रभाव
मौसम के इस बदलते मिजाज और 50 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली हवाओं को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग ने भी अलर्ट जारी किया है। लोगों को सलाह दी गई है कि:
- आंधी और बारिश के दौरान बिजली के खंभों, ऊंचे पेड़ों और जर्जर मकानों से दूर रहें।
- मेघ गर्जन और वज्रपात की स्थिति में खुले मैदान में न रहें और पक्के मकानों की शरण लें।
- किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा दें, क्योंकि ओलावृष्टि और तेज आंधी से फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां एक ओर यह बारिश गर्मी से राहत देगी, वहीं ओलावृष्टि आम और लीची की फसलों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। उत्तर बिहार के किसान जो वर्तमान में आम और लीची की पैदावार की उम्मीद कर रहे हैं, उनके लिए यह ओलावृष्टि चिंता का विषय बन गई है।
तापमान का ग्राफ और आगामी दिनों का अनुमान
आगामी 4-5 दिनों तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छिटपुट बारिश और आंधी का दौर जारी रहने वाला है। इससे कई जिलों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि, आर्द्रता (Humidity) बढ़ने के कारण उमस भी बढ़ेगी, जिससे लोगों को पसीने वाली गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
दक्षिण बिहार में जहाँ पारा 42-44 डिग्री तक पहुँच रहा था, वहां बादलों की आवाजाही से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन जब तक मानसून या कोई बड़ा वेदर सिस्टम सक्रिय नहीं होता, तब तक लू का खतरा पूरी तरह टलने वाला नहीं है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली ये नम हवाएं बिहार के पूर्वी हिस्से (जैसे पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर) में अधिक प्रभावी रहेंगी।


