
भागलपुर/सबौर। बिहार में मौसम ने भले ही तापमान के स्तर पर थोड़ी राहत दी हो, लेकिन उमस भरी गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले कुछ दिनों से पूर्वी हवाओं के सक्रिय होने के कारण वायुमंडल में नमी (आर्द्रता) का स्तर तेजी से बढ़ा है। इसका असर यह हुआ है कि जहां रात के समय लोगों को पछुआ हवाओं के साथ थोड़ी राहत मिल रही है, वहीं दिन में सूरज की तेज तपिश के साथ यह नमी मिलकर उमस को और ज्यादा बढ़ा रही है।
शुक्रवार को पूरे दिन लोगों को गर्मी और उमस का डबल अटैक झेलना पड़ा। तापमान भले ही अत्यधिक नहीं था, लेकिन हवा में मौजूद नमी ने शरीर से पसीना निकलने की प्रक्रिया को बढ़ा दिया, जिससे लोगों को अधिक परेशानी महसूस हुई। मौसम के इस बदले मिजाज ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ तापमान ही नहीं, बल्कि आर्द्रता भी गर्मी की तीव्रता तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
तापमान सामान्य से ऊपर, लेकिन राहत नहीं
मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को अधिकतम तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.4 डिग्री अधिक था। वहीं न्यूनतम तापमान 26.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.0 डिग्री अधिक दर्ज किया गया।
हालांकि, तापमान 40 डिग्री के पार नहीं पहुंचा, फिर भी उमस के कारण लोगों को ऐसा महसूस हुआ जैसे तापमान इससे कहीं ज्यादा हो। विशेषज्ञों का कहना है कि जब हवा में नमी का स्तर अधिक होता है, तो शरीर से निकलने वाला पसीना जल्दी सूख नहीं पाता, जिससे चिपचिपाहट और घुटन का अहसास होता है।
पूर्वी हवाओं का असर
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के मौसम वैज्ञानिक डॉ. बीरेंद्र कुमार के अनुसार, इस समय पूर्वी हवाओं का प्रभाव बढ़ गया है। ये हवाएं समुद्र की ओर से नमी लेकर आती हैं, जिससे वातावरण में आर्द्रता बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि यही नमी रात के समय पछुआ हवाओं के साथ मिलकर थोड़ी राहत देती है, लेकिन दिन में जब तेज धूप पड़ती है, तो यही नमी उमस में बदल जाती है। परिणामस्वरूप लोगों को दिन के समय ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।
दिन में बेहाल, रात में आंशिक राहत
शुक्रवार को दिन के समय लोग उमस और गर्मी से काफी परेशान दिखे। बाजारों में भीड़ कम नजर आई और लोग छांव या ठंडी जगहों की तलाश करते दिखे। खासकर दोपहर के समय हालात ज्यादा खराब रहे।
हालांकि, शाम ढलने के बाद और रात में तापमान थोड़ा कम होने के साथ पछुआ हवा चलने लगी, जिससे लोगों को कुछ हद तक राहत मिली। लेकिन यह राहत स्थायी नहीं रही, क्योंकि हवा में मौजूद नमी के कारण चिपचिपाहट बनी रही।
आने वाले दिनों का पूर्वानुमान
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, शनिवार को भी स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान करती रहेगी।
रविवार की शाम या रात में मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इस दौरान गरज के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। इससे तापमान में थोड़ी गिरावट आ सकती है और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा 27 से 29 अप्रैल के बीच भी मौसम कुछ हद तक अनुकूल रहने की संभावना है। इन दिनों आंशिक बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। यह स्थिति किसानों और आम लोगों दोनों के लिए राहत लेकर आ सकती है।
स्वास्थ्य पर असर
उमस भरी गर्मी का असर सिर्फ असहजता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में शरीर जल्दी थक जाता है, डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है और हीट एक्सॉशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इसलिए लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे अधिक से अधिक पानी पिएं, हल्के और ढीले कपड़े पहनें और दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें।
किसानों के लिए संकेत
मौसम में हो रहे इस बदलाव का असर कृषि कार्यों पर भी पड़ सकता है। हल्की बारिश और बादल छाए रहने से फसलों को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन अधिक नमी से कुछ फसलों में रोग लगने की संभावना भी बढ़ जाती है।
इसलिए किसानों को मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए अपने कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है।
बिहार में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज यह दिखाता है कि सिर्फ तापमान कम होने से राहत नहीं मिलती, बल्कि आर्द्रता का स्तर भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। फिलहाल लोगों को उमस भरी गर्मी से जूझना पड़ रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में हल्की बारिश से राहत मिलने की उम्मीद जरूर है।
अब सभी की नजर रविवार और उसके बाद के मौसम पर टिकी है, जब बारिश के साथ गर्मी और उमस से कुछ राहत मिलने की संभावना है।


