
पटना, 27 मई 2026: बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के छात्र-छात्राओं के उत्थान, शिक्षा, रोजगार और पर्यटन विकास को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। मुख्यमंत्री ने बुधवार को मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभागार में आयोजित ‘जनजातीय गरिमा उत्सव 2026’ कार्यक्रम में कहा कि राज्य सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।
कार्यक्रम ‘बिरसा लिब्स इन न्यू भारत’ थीम के तहत आयोजित किया गया, जिसमें पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लाभुक छात्र-छात्राओं के साथ संवाद भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई और इसमें बड़ी संख्या में छात्र, अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है और यह अवसर आदिवासी समाज के संघर्ष और योगदान को याद करने का समय है। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए जनजातीय समाज के अधिकारों के लिए आंदोलन किया था और उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत और समृद्ध बिहार की अवधारणा तभी पूरी हो सकती है जब समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को शिक्षा, अवसर और सम्मान मिले। इसी सोच के साथ राज्य सरकार छात्रवृत्ति योजनाओं और जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष फोकस कर रही है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत राज्य में लगभग एक लाख चार हजार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है। इनमें 4,155 अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थी शामिल हैं। वहीं प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत इस वर्ष 20 लाख 46 हजार छात्र-छात्राओं को सहायता दी गई है, जिनमें एक लाख 41 हजार अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थी हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा ही जीवन में सफलता का सबसे बड़ा माध्यम है और ज्ञानार्जन के जरिए ही आर्थिक उन्नति संभव है। सरकार चाहती है कि जनजातीय समाज के बच्चे आधुनिक शिक्षा से जुड़ें और प्रतियोगी दुनिया में आगे बढ़ें। इसी उद्देश्य से राज्य में मॉडल स्कूलों और डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जुलाई महीने से कई नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत की जाएगी। कैमूर जिले के अधौरा क्षेत्र में भी डिग्री कॉलेज खोला जाएगा, जहां बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग रहते हैं और लंबे समय से उच्च शिक्षा संस्थान की मांग कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि बिहार में प्रत्येक प्रखंड स्तर पर मॉडल स्कूल स्थापित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा स्थापित एकलव्य स्कूलों में सीबीएसई और बिहार बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई कराई जा रही है, जिससे जनजातीय समाज के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों में खेल और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मैराथन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को एक लाख रुपये, दूसरे स्थान पर आने वाले को 75 हजार रुपये और तीसरे स्थान पर रहने वाले को 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे युवाओं में खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी और जनजातीय क्षेत्रों की प्रतिभाओं को नई पहचान मिलेगी। साथ ही इन आयोजनों के जरिए पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने वाल्मीकिनगर और कैमूर में हेलीपोर्ट निर्माण की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में इको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और हेलीपोर्ट बनने से पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी। इससे राज्य में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में होम स्टे मॉडल को भी बढ़ावा दिया जाएगा। पर्यटक आदिवासी परिवारों के बीच रहकर उनकी संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को करीब से समझ सकेंगे। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि आदिवासी समाज की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विभाजन के बाद राज्य का वन क्षेत्र काफी कम हो गया था, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के नेतृत्व में वन क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में काम हुआ और अब राज्य का हरित क्षेत्र लगभग 15 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 17 प्रतिशत तक ले जाना है।
उन्होंने प्रधानमंत्री की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार भी अनुसूचित जनजाति समाज के उत्थान के लिए लगातार काम कर रही है। एकलव्य स्कूल, छात्रवृत्ति योजनाएं और कौशल विकास कार्यक्रम उसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन ने भी अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण के जरिए ही समाज में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है।
संवाद कार्यक्रम के दौरान छात्रवृत्ति योजना के लाभुक विद्यार्थियों ने भी मुख्यमंत्री के सामने अपने अनुभव साझा किए। कई छात्रों ने बताया कि सरकारी सहायता मिलने के बाद उन्हें पढ़ाई जारी रखने और अपने सपनों को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
कार्यक्रम में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की योजनाओं पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई। इसके जरिए विभाग द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री का स्वागत अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और हरित पौधा भेंट कर किया गया। कार्यक्रम में मुख्य सचिव , प्रधान सचिव दीपक कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी डॉ. गोपाल सिंह, शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल, विभागीय सचिव संदीप कुमार आर. पुडुकलकट्टी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि जनजातीय समाज के लिए घोषित ये योजनाएं शिक्षा, पर्यटन और आर्थिक विकास के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो बिहार के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को नई मजबूती मिल सकती है।


