पटना। बिहार राज्य महिला आयोग अब प्रदेश के सरकारी और निजी गर्ल्स हॉस्टलों का औचक निरीक्षण करने जा रहा है। आयोग का मकसद महिलाओं की सुरक्षा, मूलभूत सुविधाओं, स्वास्थ्य और पोषण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है।
आयोग की ओर से जल्द ही बड़े स्तर पर निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा, जिसमें अध्यक्ष और सदस्य खुद हॉस्टलों में जाकर छात्राओं से बातचीत करेंगे।
“आयोग एक्शन मोड में है” — अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा
महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा मिश्रा ने बताया कि आयोग पूरी तरह एक्शन मोड में है।
उन्होंने कहा:
“राज्य के कई जिलों से लड़कियां अपने सपनों को पूरा करने के लिए पटना और अन्य शहरों में पढ़ने आती हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा, स्वच्छता और पोषण सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।”
निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि हॉस्टलों में:
- पर्याप्त और पौष्टिक भोजन
- स्वच्छ शौचालय व साफ-सफाई
- सुरक्षित वातावरण
- उचित रहने की व्यवस्था
उपलब्ध है या नहीं।
चुनाव परिणाम के बाद बनेगा विस्तृत शेड्यूल
चुनाव परिणाम आने के बाद आयोग एक विस्तृत निरीक्षण शेड्यूल जारी करेगा।
इसमें तय होगा कि किस दिन किन-किन हॉस्टलों का निरीक्षण किया जाएगा।
- शुरुआत पटना यूनिवर्सिटी के महिला हॉस्टलों से
- बाद में अभियान राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तारित किया जाएगा
महिला आयोग का लक्ष्य राज्यभर के सभी छात्रावासों की स्थिति की रिपोर्ट तैयार करना है।
शिकायतों का ढेर — सुरक्षा, छेड़छाड़ और अनदेखी के मामले प्रमुख
महिला आयोग के पास पहले से कई शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें सुरक्षा में लापरवाही, उत्पीड़न, खाने की खराब व्यवस्था और उपेक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
अप्सरा मिश्रा ने कहा कि:
“कई मामले ऐसे होते हैं जो सार्वजनिक नहीं हो पाते। आयोग का प्रयास है कि हर महिला की आवाज सुनी जाए और तुरंत कार्रवाई की जाए।”
निरीक्षण के दौरान छात्राओं की व्यक्तिगत शिकायतें भी सुनी जाएँगी।
लक्ष्य — कोई भी छात्रा भय या असुरक्षा के माहौल में न रहे
महिला आयोग ने स्पष्ट किया है कि राज्यभर में महिला हॉस्टलों का वातावरण मानक और सुरक्षित होना चाहिए।
इस अभियान का उद्देश्य है:
- छात्राओं में सुरक्षा का विश्वास बढ़ाना
- हॉस्टल प्रबंधन की जवाबदेही तय करना
- बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करना
- पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी कमियों को दूर करना
इस निरीक्षण अभियान से उम्मीद है कि बिहार में महिला हॉस्टलों की स्थिति में सुधार होगा और छात्राओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वस्थ माहौल मिल सकेगा।


