मैदान से मंत्रालय तक: श्रेयसी सिंह ने संभाली खेल विभाग की कमान, अब हर जिले में बनेगा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’

पटना। बिहार के खेल जगत के लिए सोमवार, 11 मई 2026 का दिन एक नई उम्मीद और ऊर्जा लेकर आया। अंतरराष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज और तेजतर्रार जन प्रतिनिधि श्रेयसी सिंह ने पटना के विकास भवन स्थित नए सचिवालय में खेल विभाग की जिम्मेदारी संभाल ली है। विभाग पहुँचने के साथ ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है, जिसमें सबसे ऊपर बिहार को एक ‘स्पोर्ट्स हब’ के रूप में स्थापित करना और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशना शामिल है। श्रेयसी सिंह का खेल पृष्ठभूमि से होना विभाग के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है, क्योंकि एक खिलाड़ी ही मैदान की चुनौतियों और खिलाड़ियों की जरूरतों को बारीकी से समझ सकता है। कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक की और विभाग के आगामी रोडमैप पर विस्तृत चर्चा की।

एकलव्य केंद्रों की समीक्षा और खेल नीति का संकल्प

​पदभार ग्रहण करने के बाद श्रेयसी सिंह ने सबसे पहले राज्य में संचालित ‘एकलव्य केंद्रों’ की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। ये केंद्र बिहार में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के प्रशिक्षण का मुख्य आधार रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि इन केंद्रों की कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार की नई खेल नीति केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका प्रभावी क्रियान्वयन धरातल पर दिखना चाहिए।

​बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि खेल नीति ही बिहार में खेलों के समग्र विकास की आधारशिला है। इस नीति के माध्यम से न केवल खिलाड़ियों को सुविधाएं दी जाएंगी, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने और उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम होगा। उन्होंने माना कि यदि खेल नीति को सही ढंग से लागू किया जाए, तो राज्य में एक नई और सकारात्मक खेल संस्कृति विकसित होगी, जो आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार का नाम रोशन करेगी।

हर जिले में बनेगा ‘डिस्ट्रिक्ट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’

​बिहार के सुदूर इलाकों में छिपी प्रतिभाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए श्रेयसी सिंह ने एक महत्वाकांक्षी योजना का खाका पेश किया है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि राज्य के प्रत्येक जिले में “डिस्ट्रिक्ट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” विकसित किए जाने की तत्काल आवश्यकता है। उनका विजन है कि किसी भी प्रतिभावान खिलाड़ी को बेहतर संसाधनों या प्रशिक्षण के लिए अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर पटना या अन्य राज्यों में न जाना पड़े।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मुख्य विशेषताएं:

  • स्थानीय प्रशिक्षण: जिला स्तर पर ही खिलाड़ियों को आधुनिक खेल उपकरण और विशेषज्ञ कोच उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • बुनियादी ढांचा: प्रत्येक जिले में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खेल के मैदान, इंडोर स्टेडियम और जिम की सुविधा विकसित की जाएगी।
  • टैलेंट हंट: इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें ‘फास्ट-ट्रैक’ मोड में प्रशिक्षित किया जाएगा।

​श्रेयसी सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि बिहार को खेलों में अग्रणी बनाना है, तो हमें अपनी नींव मजबूत करनी होगी और यह नींव जिला स्तर के बुनियादी ढांचे से ही तैयार होगी।

पीपीपी मॉडल: खेल संस्कृति के विकास की नई राह

​आधुनिक समय में खेलों के विकास के लिए केवल सरकारी संसाधनों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसी वास्तविकता को स्वीकार करते हुए श्रेयसी सिंह ने बिहार में खेल संस्कृति के विकास के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को भविष्य की आवश्यकता बताया। उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि पीपीपी मॉडल को व्यावहारिक रूप से लागू करने के लिए एक विस्तृत और स्पष्ट गाइडलाइन तैयार की जाए।

​इस मॉडल के तहत निजी कंपनियों और खेल संस्थानों को बिहार की खेल अवसंरचना विकसित करने में शामिल किया जाएगा। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि खिलाड़ियों को कॉरपोरेट स्तर की सुविधाएं और स्पॉन्सरशिप मिलने के रास्ते भी खुलेंगे। श्रेयसी सिंह का मानना है कि निजी क्षेत्र के साथ तालमेल बिठाकर बिहार में खेलों को एक लाभदायक और प्रतिष्ठित करियर के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

अधिकारियों का स्वागत और विभागीय सक्रियता

​श्रेयसी सिंह के आगमन पर खेल विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंदर और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रवीन्द्रन शंकरण सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। अधिकारियों ने उन्हें विभाग की वर्तमान स्थिति और उन महत्वपूर्ण विषयों से अवगत कराया जो पिछले कुछ समय से लंबित थे।

​बैठक में विशेष रूप से उन मुद्दों पर चर्चा की गई जो उनके कार्यभार से दूर रहने के दौरान सामने आए थे। उन्होंने प्रत्येक बिंदु पर गहनता से जानकारी ली और फाइलों के त्वरित निष्पादन का आदेश दिया। अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंदर ने उन्हें आश्वस्त किया कि विभाग उनके विजन को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। महानिदेशक रवीन्द्रन शंकरण ने बिहार राज्य खेल प्राधिकरण द्वारा संचालित वर्तमान प्रशिक्षण कार्यक्रमों और आगामी प्रतियोगिताओं का विवरण भी साझा किया।

खिलाड़ियों के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ और जवाबदेही

​एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी होने के नाते श्रेयसी सिंह ने अधिकारियों को अनुशासन और जवाबदेही का कड़ा पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, उनके आहार और किट के वितरण में किसी भी प्रकार की धांधली या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि खेल विभाग का हर अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि का एक-एक पैसा सीधे खिलाड़ी की सुविधा पर खर्च हो।

​उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं समय-समय पर विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों और जिला स्तर के खेल मैदानों का औचक निरीक्षण करेंगी। उनका लक्ष्य है कि बिहार के खिलाड़ी जब किसी भी प्रतियोगिता में उतरें, तो उनके पास न केवल सर्वश्रेष्ठ तकनीक हो, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी चरम पर हो।

बिहार को ‘स्पोर्ट्स हब’ बनाने का महा-संकल्प

​श्रेयसी सिंह ने बिहार को केवल प्रतिभाओं का राज्य नहीं, बल्कि एक ‘स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन’ बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बिहार में राष्ट्रीय स्तर की बड़ी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे राज्य की पहचान एक खेल गंतव्य के रूप में उभरेगी। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे खेलों को केवल मनोरंजन न समझें, बल्कि इसे एक सम्मानजनक करियर के रूप में अपनाएं।

​11 मई 2026 की यह शाम बिहार के खेल इतिहास में एक नई रफ़्तार का संकेत दे रही है। श्रेयसी सिंह के नेतृत्व में अब खेल विभाग न केवल नई इमारतें खड़ा करेगा, बल्कि उन इमारतों के भीतर से अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैम्पियंस भी पैदा करेगा। विभाग के गलियारों में अब केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के संघर्ष और सफलता की गूंज सुनाई देने की उम्मीद जगी है।

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