बिहार में सोलर स्ट्रीट लाइट योजना की समीक्षा, एजेंसियों को रखरखाव और मॉनिटरिंग मजबूत करने के निर्देश

बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों को रोशन करने के उद्देश्य से चल रही मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना को लेकर पंचायती राज विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य के ग्राम पंचायतों में लगाए गए सोलर स्ट्रीट लाइट्स के बेहतर संचालन, नियमित रखरखाव और प्रभावी मॉनिटरिंग को सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने एजेंसियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

13 अप्रैल 2026 को पटना में आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षात्मक बैठक में इस योजना की प्रगति, चुनौतियों और सुधार के बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता पंचायती राज विभाग के निदेशक नवीन कुमार सिंह ने की, जिसमें ब्रेडा, विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों और तकनीकी सहयोग देने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सोलर स्ट्रीट लाइट्स का लाभ अधिकतम लोगों तक पहुंचे और उनकी कार्यक्षमता लंबे समय तक बनी रहे।

बैठक में स्पष्ट रूप से कहा गया कि जिन एजेंसियों ने अब तक सोलर स्ट्रीट लाइट्स के अधिष्ठापन का कार्य पूरी तरह पूरा नहीं किया है, उन्हें इस महीने के अंत तक हर हाल में कार्य पूरा करना होगा। विभाग ने इस कार्य में किसी भी प्रकार की देरी को गंभीरता से लेने की बात कही और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा कराने के निर्देश दिए।

ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर स्ट्रीट लाइट्स का महत्व केवल रोशनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, सुविधा और सामाजिक विकास से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इन लाइट्स का सही तरीके से काम करना अत्यंत आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए बैठक में रखरखाव व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

एजेंसियों को यह निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्थापित सर्विस सेंटर को नियमित रूप से संचालित करें। इन सेंटरों का उद्देश्य सोलर स्ट्रीट लाइट्स में आने वाली तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। यदि सर्विस सेंटर सही तरीके से काम नहीं करेंगे, तो ग्रामीण क्षेत्रों में लगी लाइट्स जल्दी खराब हो सकती हैं और उनका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा।

इसके साथ ही विभाग ने अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे समय-समय पर सोलर स्ट्रीट लाइट्स के रखरखाव की समीक्षा करें। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसी भी प्रकार की समस्या को जल्द से जल्द पहचानकर उसका समाधान किया जाए।

बैठक में एजेंसियों से यह भी कहा गया कि वे अपने सर्विस सेंटर की भौगोलिक स्थिति, संचालन व्यवस्था और उपलब्ध संसाधनों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट विभाग को प्रस्तुत करें। इससे विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में किस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं और कहां सुधार की आवश्यकता है।

डिजिटल मॉनिटरिंग को मजबूत बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विभाग ने निर्देश दिया कि सोलर स्ट्रीट लाइट्स से संबंधित सभी शिकायतों और उनके समाधान का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को ट्रैक करना आसान होगा।

इस योजना के तहत ब्रेडा के माध्यम से एक केंद्रीकृत अनुश्रवण प्रणाली विकसित की गई है, जो सोलर स्ट्रीट लाइट्स की निगरानी और रखरखाव को आसान बनाती है। इस प्रणाली के जरिए प्राप्त शिकायतों का समय पर समाधान सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी एजेंसी को एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीण लोगों को शिकायत दर्ज करने में आसानी हो, इसके लिए सोलर स्ट्रीट लाइट्स के खंभों पर व्हाट्सएप नंबर अंकित करने का निर्देश भी दिया गया है। इसके अलावा, एक मोबाइल एप्लीकेशन भी विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

यह कदम डिजिटल इंडिया और स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जहां तकनीक के माध्यम से सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि केवल लाइट्स लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका लंबे समय तक सुचारु रूप से संचालन सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए एजेंसियों, विभाग और तकनीकी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। सोलर स्ट्रीट लाइट्स के माध्यम से जहां एक ओर बिजली की बचत होती है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

ग्रामीण इलाकों में इन लाइट्स के लगने से रात के समय आवाजाही आसान हुई है, जिससे खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षा का एहसास हुआ है। इसके अलावा, गांवों में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।

बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य संबंधित कर्मियों की उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि सरकार इस योजना को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

आगे आने वाले समय में इस योजना की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि एजेंसियां और संबंधित विभाग किस तरह से मिलकर काम करते हैं और निर्धारित मानकों का पालन करते हैं।

कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि बिहार सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को रोशन करने और वहां की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए सोलर ऊर्जा आधारित समाधानों पर तेजी से काम कर रही है। यदि रखरखाव और मॉनिटरिंग की व्यवस्था मजबूत रहती है, तो यह योजना राज्य के ग्रामीण विकास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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