बिहार का राष्ट्रीय कीर्तिमान: लगातार 17 महीनों से मरीजों को मुफ्त दवा देने में देश में नंबर-1 बना राज्य

पटना | 22 फरवरी, 2026: बिहार ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने के मामले में बिहार लगातार 17वें महीने देश में पहले स्थान पर बरकरार है। भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ताजा रैंकिंग के अनुसार, बिहार ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते हुए स्वास्थ्य प्रणाली में एक नया बेंचमार्क स्थापित किया है।

​राजस्थान और पंजाब को पछाड़कर बिहार फिर शीर्ष पर

​ड्रग एंड वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम (DVDMS) सेंट्रल डैशबोर्ड द्वारा जारी जनवरी 2026 की रैंकिंग में बिहार ने 80.89 अंकों के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। उल्लेखनीय है कि बिहार ने पहली बार सितंबर 2024 में 77.20 अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया था और तब से यह रिकॉर्ड अटूट बना हुआ है।

​राष्ट्रीय रैंकिंग: शीर्ष 3 राज्य

राज्य

स्कोर (अंक)

स्थान

बिहार

80.89

प्रथम

राजस्थान

77.65

द्वितीय

पंजाब

71.31

तृतीय

रैंकिंग के अन्य छोर पर नागालैंड (28.21), लक्षद्वीप (29.46) और मणिपुर (31.02) जैसे राज्य सबसे निचले पायदान पर रहे हैं।

​सफलता की कुंजी: वृहद कार्ययोजना और सख्त प्रबंधन

​स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस सफलता के पीछे एक सोची-समझी रणनीति और ठोस कार्ययोजना रही है। राज्य सरकार ने दवाओं की उपलब्धता और वितरण सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • दवाओं की सूची का निर्धारण: सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए आवश्यक दवा सूची (Essential Drug List – EDL) का कड़ाई से निर्धारण किया गया है।
  • जवाबदेही तय करना: डीवीडीएमएस पोर्टल के माध्यम से दवा भंडारण और वितरण की निगरानी के लिए अस्पताल प्रभारी, प्रबंधक और भंडारपाल की जवाबदेही तय की गई है।
  • आभा ऐप और डिजिटल पंजीकरण: आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) ऐप के माध्यम से मरीजों का पंजीकरण और दवाओं की ट्रैकिंग सुनिश्चित की गई है।
  • रेफरल पॉलिसी: मरीजों को निचले स्तर के केंद्रों से बड़े संस्थानों में भेजने के लिए एक पारदर्शी रेफरल नीति लागू की गई है।

​डिजिटल पारदर्शिता: क्यूआर कोड से मिल रही जानकारी

​मरीजों को गुमराह होने से बचाने के लिए राज्य के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में क्यूआर (QR) कोड की सुविधा दी गई है। इस कोड को स्कैन कर मरीज या उनके परिजन यह आसानी से पता लगा सकते हैं कि उस विशेष केंद्र पर कौन-कौन सी दवाएं स्टॉक में उपलब्ध हैं। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है।

​किस स्तर के अस्पताल में कितनी दवाएं मिल रही हैं मुफ्त?

​बिहार के 10,626 सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर हर साल लगभग 6.5 करोड़ मरीज पहुंचते हैं। विभिन्न स्तरों पर मिलने वाली मुफ्त दवाओं का विवरण इस प्रकार है:

अस्पताल का प्रकार

ओपीडी (OPD) दवाएं

आईपीडी (IPD) दवाएं

कुल प्रकार

मेडिकल कॉलेज अस्पताल

356

255

611

जिला अस्पताल

287

169

456

अनुमंडलीय अस्पताल

212

101

313

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

212

97

309

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)

201

93

294

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर

151

151

स्वास्थ्य उपकेंद्र

97

97

स्वास्थ्य मंत्री का संदेश

​बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा:

​”सरकारी अस्पतालों में दवा वितरण के क्षेत्र में बिहार का प्रदर्शन पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुका है। लगातार 17 महीनों से प्रथम स्थान पर बने रहना इस बात का प्रमाण है कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था न केवल मजबूत हुई है, बल्कि पारदर्शिता और सतत निगरानी के साथ कार्य कर रही है। यह गरीब और पिछड़े वर्ग के उन करोड़ों लोगों के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें पहले महंगी दवाएं खरीदने में कठिनाई होती थी।”

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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