
पटना: बिहार विधानसभा ने निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। इस संशोधन के बाद निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे राज्य के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता कम होगी और बिहार में ही बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध होंगे।
एक सत्र के लिए मिलेगी औपबंधिक अनुमति
संशोधन के अनुसार, यदि कोई निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने वाली संस्था भवन, आधारभूत संरचना और अन्य आवश्यक सुविधाओं से संबंधित निर्धारित शर्तों को पूरा करने का आश्वासन देती है, तो राज्य सरकार उसे एक शैक्षणिक सत्र के लिए औपबंधिक (प्रोविजनल) अनुमति दे सकेगी।
यदि निर्धारित अवधि के भीतर संस्था शर्तों का पालन नहीं करती है तो यह अनुमति स्वतः समाप्त हो जाएगी।
छात्रों का पलायन रोकने पर सरकार का जोर
विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा बिहार में ही उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं और सरकार ऐसे संस्थानों को बढ़ावा देना चाहती है जो राज्य में बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करें।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ने से छात्रों को अधिक विकल्प मिलेंगे और उच्च शिक्षा का विस्तार होगा।
उच्च शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि संशोधित कानून लागू होने के बाद निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, नए विश्वविद्यालय स्थापित होंगे और राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता एवं उपलब्धता दोनों में सुधार होगा।


