बिहार में गर्मी से पहले पेयजल की पुख्ता तैयारी: 15 मार्च तक हर पंचायत का होगा ‘फील्ड सर्वे’; लापरवाही बरतने वाले इंजीनियरों पर गिरेगी गाज

पटना | 26 फरवरी, 2026: बिहार में चिलचिलाती गर्मी की आहट से पहले ही राज्य सरकार ने पेयजल संकट से निपटने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। गुरुवार को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के सचिव श्री पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्यभर की जलापूर्ति योजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में स्पष्ट किया गया कि इस बार गर्मी में पानी की किल्लत बर्दाश्त नहीं की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

पंचायतवार फील्ड सर्वे और मरम्मति दलों की रवानगी

सचिव ने सभी कार्यपालक और अधीक्षण अभियंताओं को 15 मार्च तक अपने-अपने क्षेत्रों की प्रत्येक पंचायत का अनिवार्य रूप से भ्रमण करने का निर्देश दिया है। इस ‘फील्ड सर्वे’ का मुख्य उद्देश्य उन टोलों और बसावटों की पहचान करना है, जहाँ गर्मी के दौरान जलस्तर नीचे जाने से पानी की समस्या हो सकती है।

​संभावित संकट से निपटने के लिए अगले सप्ताह से चलंत मरम्मति दलों (Mobile Repair Units) को रवाना किया जाएगा। इन दलों को संबंधित जिला पदाधिकारी (DM) हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। सचिव ने निर्देश दिया कि इन टीमों की तैनाती और उनके द्वारा किए गए कार्यों की पूरी जानकारी विभागीय एमआईएस (MIS) पोर्टल पर दर्ज होनी अनिवार्य है।

चापाकल केवल वैकल्पिक स्रोत, ‘नल का जल’ पहली प्राथमिकता

बैठक में ‘हर घर नल का जल’ योजना की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा हुई। सचिव ने साफ किया कि नए चापाकलों की स्थापना केवल उन क्षेत्रों में वैकल्पिक स्रोत के रूप में की जाएगी, जहाँ अभी तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुँचाने का कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। चापाकल कहाँ लगेगा, इसका निर्णय भू-जल स्तर की स्थिति और पंचायत स्तर पर किए गए सर्वे के आधार पर जिला प्रशासन के समन्वय से लिया जाएगा।

पंप ऑपरेटरों के वेतन भुगतान पर सख्त निर्देश

जलापूर्ति योजनाओं के सुचारू संचालन में पंप ऑपरेटरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सचिव ने उनके लंबित मानदेय पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने कार्यपालक अभियंताओं को सीधी जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि वे जिला पंचायती राज पदाधिकारी के साथ समन्वय कर पंप ऑपरेटरों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करें। यदि जिला स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो ऐसे मामलों को तुरंत मुख्यालय को सूचित किया जाए।

शिकायतों के निपटारे में सुस्ती पर कार्रवाई की चेतावनी

केंद्रीयकृत शिकायत निवारण प्रणाली (CGRC) की समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि राज्य में कुल शिकायतों की लंबितता 8.11 प्रतिशत है। विभिन्न प्रक्षेत्रों की स्थिति इस प्रकार है:

  • पटना प्रक्षेत्र: 9.19% (सर्वाधिक लंबितता)
  • मुजफ्फरपुर प्रक्षेत्र: 8.42%
  • भागलपुर प्रक्षेत्र: 7.47%
  • पूर्णिया प्रक्षेत्र: 5.30% (बेहतर प्रदर्शन)

​सचिव ने चेतावनी दी कि निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक शिकायतें लंबित रखने वाले कार्यपालक अभियंताओं के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जमीनी स्तर पर निगरानी के लिए विभाग ने मुख्यालय स्तर पर विशेष टीमों का गठन भी किया है, जो गर्मी के दौरान फील्ड में जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगी।

​बैठक में विशेष सचिव श्री संजीव कुमार, अपर सचिव श्री अरविंद कुमार, और अभियंता प्रमुख श्री नित्यानंद प्रसाद सहित विभाग के सभी वरीय पदाधिकारी मौजूद रहे।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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