बिहार में बड़े सुधार की तैयारी-‘डिरेगुलेशन फेज-2’ से आसान होगा कारोबार, कम होंगे नियम-कायदे

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत बोले—समय पर पूरा होगा मिशन

पटना।बिहार में कारोबार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में सरकार ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। पुराने सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि ‘डिरेगुलेशन फेज-2’ को तय समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा।

इस बैठक में केंद्र सरकार, नीति आयोग और बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर 23 नए प्राथमिकता क्षेत्रों और वैकल्पिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की। इसका उद्देश्य है—
नियमों को सरल बनाना,
अनावश्यक मंजूरियों को खत्म करना,
व्यवसाय और नागरिकों के लिए प्रक्रियाओं को तेज करना।


जमीन से लेकर उद्योग तक बड़े बदलाव

जमीन और भवन निर्माण

अब चेंज इन लैंड यूज (CLU) की अनिवार्यता खत्म करने पर काम होगा।
भवन निर्माण परमिट प्रक्रिया को सरल और तेज किया जाएगा।

शिक्षा और स्वास्थ्य

निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के लिए भूमि और बुनियादी ढांचे के नियमों को तर्कसंगत बनाया जाएगा।
स्वास्थ्य सेवा लाइसेंस के लिए एक सिंगल नोडल एजेंसी बनाई जाएगी।

उद्योग और एमएसएमई

औद्योगिक क्लस्टरों में अनुमोदन के लिए राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण को अधिक अधिकार दिए जाएंगे।
एमएसएमई के लिए स्व-घोषणा आधारित प्रणाली लागू की जाएगी।

बिजली, पर्यावरण और सेवा का अधिकार

बिजली कनेक्शन प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
पर्यावरण मंजूरी बैठकों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
RTS के तहत ऑटो-अपील सिस्टम लागू किया जाएगा।


केंद्र और नीति आयोग भी साथ

बैठक में केंद्र सरकार और नीति आयोग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें
डॉ. निधि पांडेय,
सुश्री राधा कत्याल नारंग,
राहुल श्रेष्ठा,
गगन कुमार शामिल रहे।

राज्य सरकार की ओर से शिक्षा, उद्योग, ऊर्जा, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


यह पहल बिहार को निवेश, उद्योग और नागरिक सेवाओं के लिहाज से अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

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