​एनडीए के ‘परिवारवादी’ चेहरों पर तेजस्वी यादव का हमला: 17 मंत्रियों को बताया विरासत की उपज; भाजपा-जदयू के दावों को दी चुनौती

पटना। बिहार में नई सरकार के गठन और सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ ही प्रदेश की सियासत में ‘परिवारवाद’ का मुद्दा एक बार फिर केंद्र बिंदु में आ गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा और जदयू पर तीखा हमला बोला है। राजधानी पटना के वीरचंद पटेल पथ स्थित राजद प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता के दौरान तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार के नए मंत्रियों की सूची को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने साक्ष्यों के साथ यह दावा किया कि जो दल कल तक दूसरों पर परिवारवाद का आरोप लगाते थे, आज वे खुद उसी परंपरा को सबसे अधिक बढ़ावा दे रहे हैं। तेजस्वी यादव के इस हमले ने न केवल मंत्रिमंडल की संरचना पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन बयानों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है जो वे अक्सर चुनावी रैलियों में ‘शाहजादा’ शब्द का इस्तेमाल कर विपक्ष पर निशाना साधने के लिए करते हैं।

35 में से 17 मंत्री परिवारवाद की उपज: तेजस्वी का बड़ा दावा

​राजद कार्यालय में आयोजित इस प्रेसवार्ता में तेजस्वी यादव ने मंत्रिमंडल के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए सत्ता पक्ष को घेरा। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सम्राट मंत्रिमंडल के विस्तार में शामिल कुल 35 मंत्रियों में से 17 मंत्री सीधे तौर पर परिवारवाद की उपज हैं। तेजस्वी यादव का तर्क है कि मंत्रिमंडल के लगभग 50 प्रतिशत सदस्य किसी न किसी राजनैतिक घराने या प्रभावशाली नेता के वारिस के रूप में सत्ता की कुर्सी तक पहुँचे हैं।

​उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और जदयू के पास अब ‘परिवारवाद’ जैसे शब्दों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह मंत्रिमंडल सामाजिक समीकरणों को साधने के नाम पर केवल प्रभावशाली परिवारों को खुश करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता अब इन दलों के दोहरे चरित्र को पहचान चुकी है, जहाँ मंच से कुछ और कहा जाता है और सत्ता के बंटवारे के समय अपनी ही बातों को भुला दिया जाता है।

बिना चुनाव लड़े मंत्री बनने का नया ट्रेंड: निशांत और दीपक प्रकाश पर निशाना

​तेजस्वी यादव ने अपनी प्रेसवार्ता के दौरान दो विशिष्ट नामों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मर्यादा को ताक पर रखते हुए दो ऐसे नेतापुत्रों को मंत्री बना दिया गया है, जिन्होंने कोई चुनाव ही नहीं लड़ा है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत और उपेन्द्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश की ओर इशारा करते हुए कहा कि बिना किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) की सदस्यता के इन्हें सीधे मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है।

​तेजस्वी यादव का कहना है कि यह उन कार्यकर्ताओं के मुंह पर तमाचा है जो वर्षों से धूप और धूल में पार्टी का झंडा लेकर चलते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एनडीए में योग्यता का पैमाना केवल ‘बड़े नेता का बेटा’ होना रह गया है? नेता प्रतिपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का हनन बताया और कहा कि जनता यह देख रही है कि कैसे पिछले दरवाजे से सत्ता की मलाई अपनों को बांटी जा रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मंत्रिमंडल में तीन मंत्री ऐसे हैं जो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे हैं, जो इस बात की पुष्टि करता है कि एनडीए की सरकार पूरी तरह से विरासत की राजनीति पर टिकी हुई है।

प्रधानमंत्री से सीधा सवाल: “अब किसको शहजादा कहेंगे पीएम?”

​इस प्रेस वार्ता का सबसे चर्चित हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा गया सवाल रहा। तेजस्वी यादव ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को चुनौती देते हुए पूछा कि अब प्रधानमंत्री चुनाव में किसको ‘शहजादा’ कहकर पुकारेंगे? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अक्सर विपक्ष के युवा नेताओं को शहजादा कहकर अपमानित करते रहे हैं, लेकिन अब उनके अपने ही मंत्रिमंडल और गठबंधन में ‘शाहजादों’ की पूरी फ़ौज खड़ी है।

​तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि क्या प्रधानमंत्री अब नीतीश कुमार के बेटे या उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे के लिए भी उसी शब्द का इस्तेमाल करेंगे? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की कथनी और उनकी पार्टी की करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। जब भाजपा दूसरों के परिवारवाद पर बोलती है, तो उसे ‘राष्ट्रवाद’ कहा जाता है, लेकिन जब वही काम भाजपा खुद करती है, तो उसे ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का नाम दे दिया जाता है। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री को अब बिहार की जनता को यह बताना चाहिए कि उनके खुद के गठबंधन में मौजूद ये 17 परिवारवादी चेहरे क्या हैं।

युवाओं और रोजगार के मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी

​प्रेसवार्ता के दौरान तेजस्वी यादव केवल परिवारवाद तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने राज्य के ज्वलंत मुद्दों, विशेषकर बेरोजगारी और युवाओं पर हो रहे पुलिसिया दमन को लेकर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने हाल ही में पटना की सड़कों पर शिक्षक अभ्यर्थियों (TRE 4) पर हुए लाठीचार्ज का जिक्र किया। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि अब नौजवानों को लाठी से मारकर उनकी नौकरी और रोजगार की मांग को दबाया जाएगा

​उन्होंने कहा कि नई सरकार बनते ही छात्रों और बेरोजगारों के लिए दरवाजे बंद कर दिए गए हैं। जब युवा अपना हक मांगने सड़कों पर उतरते हैं, तो उन्हें पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ता है। तेजस्वी यादव ने कहा कि एक तरफ मंत्रिमंडल में राजनेताओं के बेटों को बिना चुनाव लड़े कुर्सियां दी जा रही हैं, और दूसरी ओर जो युवा पढ़-लिखकर नौकरी की उम्मीद कर रहे हैं, उन्हें सड़कों पर लहूलुहान किया जा रहा है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि युवाओं का यह आक्रोश जल्द ही एक बड़े आंदोलन का रूप लेगा और राजद पूरी मजबूती के साथ इन युवाओं के साथ खड़ा रहेगा।

भाजपा और जदयू के लिए कड़े सवाल

​तेजस्वी यादव ने अपनी बात को विराम देते हुए कहा कि बिहार की जनता इस ‘दोगलेपन’ का हिसाब आने वाले समय में जरूर लेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा और जदयू को अब आईने में अपनी तस्वीर देखनी चाहिए और परिवारवाद जैसे भारी-भरकम शब्दों का उपयोग बंद कर देना चाहिए क्योंकि वे खुद अब उसी नाव पर सवार हैं। राजद नेता ने स्पष्ट किया कि विपक्ष अब चुप नहीं बैठेगा और इस मंत्रिमंडल की खामियों को गांव-गांव तक पहुँचाया जाएगा।

​प्रेसवार्ता में राजद के कई अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे, जिन्होंने तेजस्वी यादव के सुर में सुर मिलाते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सत्ता पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव ने ‘शहजादा’ और ‘परिवारवाद’ के कार्ड को एनडीए के ही खिलाफ इस्तेमाल कर एक नई राजनैतिक बिसात बिछा दी है, जिससे आने वाले समय में चुनावी मैदान में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और अधिक तेज होने की उम्मीद है।

​तेजस्वी यादव ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि राजद का संघर्ष केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वे इसे सदन से लेकर सड़क तक ले जाएंगे ताकि बिहार के असली मुद्दों को परिवारवाद की चकाचौंध में दबने न दिया जाए। सरकार के गठन के कुछ ही दिनों के भीतर विपक्ष का यह आक्रामक रुख राज्य की राजनीति में आगामी कड़वाहट का साफ संकेत दे रहा है।

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