पिता का संघर्ष, बेटे का राजतिलक: शकुनी चौधरी बोले- ‘जो मैं नहीं कर सका, वो सम्राट ने कर दिखाया’

पटना। बिहार की सत्ता में आए इस युगांतरकारी बदलाव ने न केवल राजनैतिक गलियारों में हलचल मचाई है, बल्कि एक ऐतिहासिक पारिवारिक विरासत को भी उसके चरम मुकाम तक पहुँचा दिया है। 15 अप्रैल 2026 की यह दोपहर शकुनी चौधरी के लिए केवल एक राजनैतिक घटना नहीं, बल्कि दशकों के संघर्ष की सुखद परिणति थी। जब उनके बेटे सम्राट चौधरी ने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तो बिहार की राजनीति के ‘पितामह’ कहे जाने वाले शकुनी चौधरी की आँखें नम हो गईं। यह एक ऐसे पिता की भावुकता थी जिसने बिहार की माटी में समाजवाद और ‘लव-कुश’ समीकरण के बीज बोए, कई बार सत्ता के करीब पहुँचे, लेकिन कभी उस शिखर को नहीं छू सके जहाँ आज उनका बेटा खड़ा है। अपने आवास पर बधाई देने वालों के बीच घिरे शकुनी चौधरी ने इस क्षण को अपने पूरे परिवार और समर्थकों के लिए ‘गौरव का क्षण’ बताया।

पिता का संघर्ष, बेटे का राजतिलक: शकुनी चौधरी बोले- 'जो मैं नहीं कर सका, वो सम्राट ने कर दिखाया'

दशकों का संघर्ष और एक अधूरा सपना

​शकुनी चौधरी का राजनैतिक सफर बिहार के संघर्षपूर्ण दौर की कहानी है। उन्होंने उस समय राजनीति शुरू की थी जब पिछड़ा वर्ग अपनी पहचान के लिए लड़ रहा था। अपने अतीत को याद करते हुए भावुक स्वर में उन्होंने कहा:

​”मैंने अपनी पूरी उम्र संघर्ष में बिता दी। कई दशकों तक सड़कों पर रहा, जेल गया और समाज के पिछड़े वर्गों को एकजुट करने के लिए दिन-रात एक कर दिया। हमने ‘लव-कुश’ समीकरण को एक ऐसी ताकत बनाया जिसके बिना बिहार की सत्ता की कल्पना नहीं की जा सकती। समता पार्टी से लेकर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा तक के निर्माण में मैंने अपना पसीना बहाया। मैंने पूरी लड़ाई लड़ी, लेकिन शायद ईश्वर ने यह मुकाम मेरे लिए नहीं, बल्कि मेरे बेटे के लिए लिख रखा था। आज सम्राट ने वह कर दिखाया, जो मैं चाहकर भी नहीं कर सका।”

 

शीर्ष नेतृत्व का भरोसा: दिल्ली से पटना तक की सहमति

​शकुनी चौधरी ने इस सफलता का श्रेय व्यक्तिगत योग्यता के साथ-साथ देश और प्रदेश के बड़े नेताओं के भरोसे को दिया। उन्होंने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री जैसा गरिमामय पद केवल विरासत से नहीं, बल्कि क्षमता से मिलता है।

  • नरेन्द्र मोदी और अमित शाह: शकुनी चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार जताते हुए कहा कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सम्राट के भीतर के ‘नेतृत्व की ताकत’ को पहचाना।
  • नीतीश कुमार का साथ: उन्होंने विशेष रूप से नीतीश कुमार के समर्थन का जिक्र किया। उनके अनुसार, नीतीश कुमार की सहमति इस बात का प्रमाण है कि सम्राट चौधरी में सबको साथ लेकर चलने की परिपक्वता है।
  • दो विचारधाराओं का मिलन: उन्होंने कहा कि जब भाजपा और जदयू जैसे दो अलग-अलग आधार वाले दल एक नाम पर सहमत होते हैं, तो वह उस नेता की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। सम्राट ने गठबंधन के भीतर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

युवा नेतृत्व और बिहार की नई उम्मीदें

​एक अनुभवी राजनेता के तौर पर शकुनी चौधरी ने यह भी माना कि सम्राट चौधरी के कंधों पर अब उम्मीदों का बहुत बड़ा बोझ है। उन्होंने कहा कि जब किसी युवा नेता को प्रधानमंत्री और राज्य के तमाम वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद मिलता है, तो उसकी जवाबदेही कई गुना बढ़ जाती है।

​उन्होंने विश्वास जताया कि सम्राट न केवल उनकी राजनैतिक विरासत को आगे बढ़ाएंगे, बल्कि अपनी कार्यक्षमता से बिहार की जनता की आकांक्षाओं पर भी खरे उतरेंगे। शकुनी चौधरी के अनुसार, सम्राट की सबसे बड़ी ताकत उनका ‘जनता का भरोसा’ है। उन्होंने कहा कि एक पिता के रूप में वे सम्राट को केवल यही नसीहत देंगे कि वे न्याय और पारदर्शिता के साथ बिहार के हर गरीब और पिछड़े वर्ग की सेवा में खुद को समर्पित कर दें।

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