
बिहार की राजनीति इन दिनों नई करवट लेती दिख रही है। एक ओर राष्ट्रीय जनता दल में तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उनके भव्य स्वागत की तैयारी चल रही है, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पहली बार पटना आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है। दोनों दल अपने-अपने नेताओं के स्वागत को यादगार बनाने में जुटे हैं।
राजद कार्यालय में तेजस्वी के स्वागत की तैयारी
तेजस्वी यादव के कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद 7 फरवरी को पटना स्थित राजद कार्यालय में भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यालय को सजाया जा रहा है और कार्यकर्ताओं में खास जोश देखा जा रहा है। राजद नेताओं का कहना है कि युवा नेतृत्व के आने से पार्टी को नई ऊर्जा मिलेगी और संगठन और मजबूत होगा।
विधान पार्षद उर्मिला ठाकुर ने कहा—
“तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सामाजिक न्याय की विचारधारा और मजबूत होगी। वह नेपोलियन की तरह संगठन को आगे बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। सड़क से सदन तक जनता के सवाल उठाए जाएंगे।”
जहानाबाद के विधायक राहुल शर्मा का कहना है कि लालू प्रसाद जैसे अनुभवी नेता के मार्गदर्शन में तेजस्वी का नेतृत्व पार्टी के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा।
भाजपा में भी उत्सव जैसा माहौल
वहीं भाजपा में भी उल्लास का वातावरण है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन 9 फरवरी को पहली बार पटना आ रहे हैं। पार्टी कार्यालय से लेकर बूथ स्तर तक उनके स्वागत की तैयारियां चल रही हैं।
भाजपा विधान पार्षद संजय मयूख ने कहा—
“एक बिहारी और ऊर्जावान युवा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है। उनके नेतृत्व में पार्टी नई ऊंचाइयों को छुएगी।”
खेल एवं युवा मामलों की मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी इसे ऐतिहासिक अवसर बताया—
“देश के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष का बिहार से होना गौरव का विषय है। यह दौरा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरेगा।”
जानकारों की नजर में क्या संकेत?
वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडे मानते हैं कि दोनों दलों के कार्यक्रम यह संदेश दे रहे हैं कि बिहार की राजनीति अब युवा नेतृत्व के इर्द-गिर्द केंद्रित हो रही है। संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश तेज हो गई है।
तेजस्वी के सामने चुनौतियां भी
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजय कुमार के अनुसार, तेजस्वी यादव के सामने पार्टी को एकजुट रखने और महागठबंधन को साधे रखने की बड़ी चुनौती होगी।
“तेजस्वी ने कई मौकों पर खुद को साबित किया है, लेकिन 2025 चुनाव में एनडीए की एकजुटता ने उनकी कमजोरी भी उजागर की। आगे की राह आसान नहीं होगी।”


