पटना: बिहार की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की ओर से दिए गए इफ्तार के न्योते को स्वीकार कर लिया है। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पटना स्थित अपने आवास पर AIMIM नेताओं से मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में इस बात की पुष्टि की।
घंटों चली बैठक के बाद सामने आया बयान
मिली जानकारी के अनुसार पटना के 1 पोलो रोड स्थित तेजस्वी यादव के सरकारी आवास पर AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान समेत कई नेताओं के साथ लंबी बातचीत हुई। इस बैठक के बाद तेजस्वी यादव ने मीडिया के सामने कहा कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई और कई राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई।
तेजस्वी ने कहा कि AIMIM नेताओं की ओर से उन्हें 15 तारीख को आयोजित होने वाली इफ्तार पार्टी का निमंत्रण दिया गया है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।
इफ्तार कार्यक्रम में शामिल होने के संकेत
तेजस्वी यादव ने यह भी संकेत दिया कि वह 15 मार्च को होने वाले इस इफ्तार कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बिहार में विपक्षी दलों के बीच नए समीकरण बनने की शुरुआत हो रही है।
“हम चुनाव भी जीतेंगे” – तेजस्वी यादव
मीडिया से बातचीत के दौरान तेजस्वी यादव काफी आत्मविश्वास में नजर आए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आने वाले चुनावों में उनकी पार्टी मजबूत स्थिति में है और विपक्ष मिलकर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक संवाद लोकतंत्र का हिस्सा है और अलग-अलग दलों के बीच बातचीत होना स्वाभाविक है।
राजनीतिक समीकरणों को लेकर बढ़ी चर्चा
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि AIMIM और आरजेडी के बीच बढ़ती नजदीकियां बिहार की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती हैं। खासकर राज्यसभा चुनाव और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को लेकर यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यदि दोनों दलों के बीच तालमेल बढ़ता है, तो इसका असर राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है। खासतौर पर मुस्लिम मतदाताओं के समीकरण और विपक्षी दलों की रणनीति को लेकर यह मुलाकात अहम मानी जा रही है।
एनडीए खेमे में भी बढ़ी हलचल
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि आरजेडी और AIMIM के बीच राजनीतिक समझ बढ़ती है, तो इससे सत्तारूढ़ गठबंधन की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों दलों की इस मुलाकात को लेकर बिहार की राजनीति में कयासों का दौर जारी है और आने वाले दिनों में इसके और भी राजनीतिक मायने निकल सकते हैं।


