बिहार पुलिस ने तकनीकी नवाचार में बढ़ाया कदम, सीसीटीएनएस और ई-गवर्नेंस के जरिये तेजी से बदल रहा पुलिसिंग मॉडल

पटना, 28 जुलाई।बिहार पुलिस अब तकनीकी नवाचारों के माध्यम से पुलिसिंग को आधुनिक और जवाबदेह बनाने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है। राज्य के सभी 968 सीसीटीएनएस (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) आच्छादित थानों में अब स्टेशन डायरी, एफआईआर और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रविष्टि डिजिटल माध्यम से की जा रही है। इस प्रक्रिया की 24×7 निगरानी पटना स्थित पुलिस मुख्यालय के नियंत्रण कक्ष से की जा रही है।

सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल लॉग सिस्टम में व्यापक सुधार

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, राज्य के कुल 1212 थाना और ओपी में सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं। शेष 176 थाना-ओपी में कैमरा स्थापना की प्रक्रिया जारी है। सभी थानों से प्राप्त फीड पर निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत कंट्रोल रूम पुलिस मुख्यालय में सक्रिय है, जो तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए हर समय उपलब्ध है।

सीसीटीएनएस से जुड़ रहे हैं नए थाने और अधिकारी

नवसृजित व नवउत्क्रमित 373 थानों को भी जल्द ही सीसीटीएनएस से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए हार्डवेयर, नेटवर्क और सॉफ्टवेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थापना की जा रही है।
इसके साथ ही 8661 अन्वेषण पदाधिकारियों को एसएमएस सेवा से जोड़ा गया है। सीआईडी ने 4344 मोबाइल फोन और लैपटॉप की खरीद की है ताकि अधिकारी कहीं से भी कार्य कर सकें।

जीरो एफआईआर की संख्या में वृद्धि

1 जुलाई 2024 से 27 जुलाई 2025 तक बिहार में कुल 1378 जीरो एफआईआर दर्ज की गईं।

  • 01 जुलाई – 31 दिसंबर 2024: 627
  • 01 जनवरी – 27 जुलाई 2025: 751

यह आँकड़ा दर्शाता है कि राज्य में महिलाओं और आम नागरिकों की शिकायतों को प्राथमिकता पर दर्ज किया जा रहा है।

‘सिटिजन सर्विस पोर्टल’ जल्द होगा शुरू, घर बैठे मिलेंगी 20 से अधिक सेवाएं

बिहार पुलिस द्वारा एक सिटिजन सर्विस पोर्टल अगस्त माह में शुरू किया जाएगा, जो नागरिकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ही पुलिस संबंधी कई सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

प्री-लॉगिन सेवाएं:

  1. प्राथमिकी की प्रति प्राप्त करना
  2. गोपनीय सूचना देना
  3. अपराधियों और इनामी अपराधियों की जानकारी देखना

पोस्ट-लॉगिन सेवाएं:

  1. खोई हुई संपत्ति की रिपोर्ट
  2. गुमशुदा व्यक्ति की शिकायत
  3. घरेलू सहायक और किरायेदार का सत्यापन
  4. चालक सत्यापन
  5. वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण
  6. ई-शिकायत दर्ज करना
  7. अज्ञात शव और बरामद संपत्ति की सूचना
  8. वांछित/गिरफ्तार अपराधियों की जानकारी

ई-समन प्रणाली और डिजिटल मुकदमा प्रक्रिया का प्रशिक्षण

18 व 25 जुलाई को सभी जिलों के एसपी, डीएसपी, अभियोजन प्रभारी को ई-समन प्रणाली का प्रशिक्षण दिया गया है।
1 जून से 28 जुलाई 2025 के बीच 54,717 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

स्वास्थ्य विभाग के साथ डेटा इंटीग्रेशन

पोस्टमार्टम एवं एमएलसी मॉड्यूल का सफल इंटीग्रेशन सीसीटीएनएस से कर लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब इसे सक्रिय उपयोग के लिए लागू किया जाना है।


बिहार पुलिस का यह प्रयास न केवल अपराध नियंत्रण में मदद करेगा, बल्कि आम नागरिकों की शिकायतों को तेज़ी से दर्ज और निपटाने में भी मील का पत्थर साबित होगा।


 

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