बिहार में 2026 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की हलचल तेज हो गई है। इस बार का चुनाव कई बड़े तकनीकी और प्रशासनिक बदलावों का गवाह बनने जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पहली बार पंचायत चुनाव में बैलेट पेपर की जगह EVM का इस्तेमाल करने का निर्णय ले लिया है—और वह भी मल्टी पोस्ट ईवीएम, जिससे मतदान प्रक्रिया में बड़ा परिवर्तन दिखाई देगा।
एक ही कंट्रोल यूनिट, छह पद—मतदाता एक साथ करेंगे मतदान
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक मल्टी पोस्ट ईवीएम में—
- 1 कंट्रोल यूनिट (CU)
- 6 बैलेट यूनिट (BU)
लगाई जाएंगी।
मतदाता एक ही मतदान केंद्र पर वार्ड सदस्य, पंच, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और सरपंच—इन 6 पदों के लिए अलग-अलग बैलेट यूनिट पर वोट डाल सकेंगे।
इससे—
- मतदान तेज होगा
- मतगणना सरल व कम त्रुटिपूर्ण होगी
- परिणाम जल्द जारी करना संभव होगा
यह पहली बार है जब पंचायत चुनाव में इतनी बड़ी तकनीकी व्यवस्था लागू की जा रही है।
नए आरक्षण रोस्टर से कई सीटों का चेहरा बदलेगा
2026 के चुनाव में सिर्फ तकनीकी बदलाव ही नहीं, बल्कि आरक्षण में भी बड़ा फेरबदल होगा।
पंचायती राज नियमों के अनुसार हर दो कार्यकाल के बाद आरक्षित सीटों में बदलाव अनिवार्य है।
इस बार—
- जिला परिषद
- मुखिया
- पंचायत समिति सदस्य
- सरपंच
- पंच
- वार्ड सदस्य
सभी पदों पर नए सिरे से आरक्षण श्रेणी तय होगी।
इससे कई मौजूदा जनप्रतिनिधियों की सीटें बदल सकती हैं और कई सीटों पर महिला, एससी–एसटी, पिछड़ा वर्ग जैसी श्रेणियों में बदलाव के संकेत हैं।
महिलाओं के लिए 50% आरक्षण के चलते कई जिलों में महिला प्रतिनिधित्व और बढ़ने की संभावना है।
आरक्षण और परिसीमन की प्रक्रिया मार्च 2026 के बाद शुरू होगी।
परिसीमन भी होगा, कई पंचायतों की संरचना बदल सकती है
इस बार पंचायतों की सीमाएं भी नए सिरे से तय होंगी।
जिन क्षेत्रों में जनसंख्या बढ़ी है या पंचायतों का आकार बड़ा/छोटा हुआ है, वहां परिसीमन के बाद नया नक्शा देखने को मिल सकता है।
इसके चलते कई सीटों की भूगोल और राजनीतिक परिस्थिति पूरी तरह बदल जाएगी।
क्यों अहम है यह पंचायत चुनाव?
पंचायतें बिहार में विकास का सबसे बड़ा स्थानीय ढांचा हैं। इनके प्रतिनिधि—
- सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
- मनरेगा
- स्थानीय विकास कार्य
- सड़क–नाली निर्माण
- शिक्षण एवं स्वास्थ्य निगरानी
जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का संचालन करते हैं।
इसी वजह से पंचायत चुनाव न सिर्फ ग्रामीण राजनीति बल्कि सामाजिक संरचना को भी प्रभावित करते हैं।
कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त, आयोग तेजी से तैयारी में जुटा
वर्तमान पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल अक्टूबर–नवंबर 2026 में पूरा हो जाएगा।
इसी के चलते आयोग—
- परिसीमन
- आरक्षण निर्धारण
- मल्टी पोस्ट ईवीएम की सप्लाई
- प्रशिक्षण
- मतदान केंद्र सूची
जैसी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने में जुट गया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि 2026 का पंचायत चुनाव तकनीक, पारदर्शिता और नए राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से अब तक का सबसे बड़ा बदलाव लेकर आएगा।


