
बिहार की राजनीति इस समय बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। लंबे समय से जारी सियासी हलचल अब अपने चरम पर है और संकेत साफ हैं कि राज्य में सत्ता परिवर्तन लगभग तय हो चुका है। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार यानी 14 अप्रैल को शाम 4 बजे बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की अहम बैठक में नए नेता के नाम पर अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है।
एनडीए बैठक में होगा अंतिम फैसला
राजनीतिक घटनाक्रम के अनुसार, मंगलवार को पहले दोपहर 3 बजे भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल की बैठक होगी। इसके तुरंत बाद शाम 4 बजे बिहार विधानसभा के सेंट्रल हॉल में एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।
इस बैठक में गठबंधन के सभी विधायक और प्रमुख नेता शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इसी दौरान विधायक दल का नेता चुना जाएगा, जो राज्य का अगला मुख्यमंत्री होगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी केंद्रीय नेता करेंगे, जिन्हें पार्टी ने पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है।
नीतीश कुमार दे सकते हैं इस्तीफा
सूत्रों की मानें तो मौजूदा मुख्यमंत्री मंगलवार को दोपहर करीब 3:30 बजे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। इससे पहले सुबह 11 बजे कैबिनेट की अंतिम बैठक बुलाई गई है, जिसे मौजूदा सरकार की आखिरी बैठक माना जा रहा है।
नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा, जहां नेतृत्व परिवर्तन के साथ नई रणनीति और नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
तेज हुई सियासी गतिविधियां
राज्य में राजनीतिक हलचल तेजी से बढ़ गई है। जदयू और बीजेपी दोनों ही दलों में लगातार बैठकों का दौर जारी है। नेताओं के बीच रणनीतिक चर्चा हो रही है और अंतिम फैसलों को लेकर गहन मंथन किया जा रहा है।
इसी बीच राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा का डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पहुंचना भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। करीब आधे घंटे चली इस मुलाकात ने सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और तेज कर दिया है।
सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे
मुख्यमंत्री पद की रेस में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में उनकी दावेदारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
इतना ही नहीं, उनके समर्थन में राज्य के कई जिलों में धार्मिक अनुष्ठान और हवन-पूजन भी आयोजित किए जा रहे हैं। पटना और खगड़िया जैसे जिलों में उनके समर्थकों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना कर उनके मुख्यमंत्री बनने की कामना की है।
पोस्टर हटने से बदले संकेत
सियासी बदलाव के संकेत जमीनी स्तर पर भी साफ दिखाई देने लगे हैं। जदयू कार्यालय से ‘फिर से नीतीश’ जैसे पोस्टर हटाए जा रहे हैं, जो पहले चुनावी अभियान का हिस्सा थे।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर लगे पोस्टरों को भी हटाया जा रहा है। इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और नए नेतृत्व की तैयारी का संकेत माना जा रहा है।
नई कैबिनेट की तैयारी लगभग पूरी
सूत्रों के अनुसार, सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि नई कैबिनेट का प्रारूप भी लगभग तैयार कर लिया गया है। गठबंधन के सभी दलों के बीच मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी को लेकर सहमति बन चुकी है।
जैसे ही मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होगी, उसके बाद जल्द ही शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। यह संभावना जताई जा रही है कि 15 अप्रैल को नई सरकार शपथ ले सकती है।
अगले 24 घंटे बेहद अहम
बिहार की राजनीति के लिए अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इन घंटों में न सिर्फ मुख्यमंत्री का चेहरा तय होगा, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा भी तय हो जाएगी।
जनता, राजनीतिक दल और विश्लेषक—सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आखिरकार बिहार की कमान किसके हाथों में जाएगी।
बिहार में सत्ता परिवर्तन अब सिर्फ औपचारिकता भर रह गया है। एनडीए की बैठक में अंतिम फैसला होते ही राज्य को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा।
यह बदलाव न सिर्फ नेतृत्व में परिवर्तन लाएगा, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति और प्रशासनिक दिशा को भी प्रभावित करेगा। अब सभी की निगाहें कल शाम 4 बजे होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहां बिहार के नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत होगी।


