
पटना: बिहार विधानसभा में मंगलवार को विधायक निधि (मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना) की राशि 4 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 6 करोड़ रुपये करने की मांग सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की ओर से जोरदार तरीके से उठाई गई। महंगाई और अन्य राज्यों में अधिक राशि मिलने का हवाला देते हुए लगभग सभी दलों के विधायकों ने विधायक निधि बढ़ाने की मांग का समर्थन किया।
महंगाई का हवाला देकर बढ़ोतरी की मांग
प्रश्नकाल के दौरान कई विधायकों ने कहा कि निर्माण सामग्री और विकास कार्यों की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा 4 करोड़ रुपये की राशि पर्याप्त नहीं है। सदस्यों ने कहा कि कई राज्यों में विधायकों को इससे अधिक राशि उपलब्ध कराई जाती है, इसलिए बिहार में भी विधायक निधि बढ़ाई जानी चाहिए।
बिना निविदा 25 लाख तक काम कराने की मांग
विधायकों ने यह भी मांग उठाई कि वर्तमान में बिना निविदा कार्य कराने की सीमा 15 लाख रुपये है, जिसे बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया जाए। उनका तर्क था कि बढ़ती लागत के कारण छोटी-छोटी योजनाओं के लिए भी निविदा प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है, जिससे विकास कार्यों में देरी होती है।
सांसदों की तरह मिले अधिक अधिकार
सदन में यह मांग भी उठी कि सांसदों की तर्ज पर विधायकों को भी सीसीटीवी, सोलर स्ट्रीट लाइट, एंबुलेंस, शव वाहन जैसी योजनाओं की अनुशंसा करने का अधिकार दिया जाए। सदस्यों ने कहा कि इससे स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को गति मिलेगी।
सरकार ने सकारात्मक विचार का दिया संकेत
योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि सरकार विधायक निधि बढ़ाने सहित सदस्यों द्वारा उठाए गए सभी सुझावों पर विचार करेगी। उन्होंने बिना निविदा कार्य की सीमा 15 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक विचार करने की बात कही।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने भी कहा कि यदि केंद्र सरकार की तर्ज पर नियम बनाए जा सकते हैं तो राज्य सरकार को इस दिशा में आवश्यक निर्णय पर विचार करना चाहिए।
नोट: फिलहाल विधायक निधि की राशि बढ़ाने या नियमों में बदलाव को लेकर कोई औपचारिक सरकारी घोषणा नहीं हुई है। सदन में उठे सुझावों पर सरकार द्वारा विचार किए जाने की बात कही गई है।


