बिहार में अल्पसंख्यक राजनीति में बदलाव के संकेत, डिप्टी सीएम विजय चौधरी बोले- विकास और काम के आधार पर बढ़ रहा NDA पर भरोसा

पटना, 18 मई 2026: बिहार की राजनीति में अल्पसंख्यक समुदाय के बदलते रुझान को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। राजधानी पटना में जदयू के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य खालिद अनवर के सरकारी आवास पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में अल्पसंख्यक समुदाय के कई प्रमुख प्रतिनिधियों और राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के बीच विस्तार से बातचीत हुई। बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि बिहार में अल्पसंख्यक समाज का झुकाव तेजी से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की ओर बढ़ रहा है।

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब बिहार में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और आगामी चुनावों को लेकर सभी दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हुए हैं। खासकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को लेकर बिहार की राजनीति हमेशा से संवेदनशील रही है। ऐसे में इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, जदयू एमएलसी खालिद अनवर के आवास पर आयोजित इस बैठक में बिहार के अलग-अलग जिलों से आए अल्पसंख्यक समुदाय के प्रबुद्ध लोग शामिल हुए। बैठक में सामाजिक, राजनीतिक और विकास से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि यह कोई औपचारिक राजनीतिक बैठक नहीं थी, बल्कि समाज के लोगों के साथ एक संवाद कार्यक्रम था।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान विजय चौधरी ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय अब “बड़े नाम” या दिखावटी राजनीति से आगे बढ़कर काम करने वाली राजनीति को महत्व दे रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों ने साफ तौर पर यह बात रखी कि वे उसी राजनीतिक ताकत के साथ खड़े होंगे जो वास्तव में उनके विकास और अधिकारों के लिए काम करेगी।

उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने अल्पसंख्यकों के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, छात्रवृत्ति, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा किए गए कार्यों का असर अब समाज के बीच दिखाई देने लगा है।

विजय चौधरी ने कहा कि यह संतोष की बात है कि अल्पसंख्यक समाज के बीच एनडीए के प्रति सकारात्मक माहौल बन रहा है। उनके अनुसार, सरकार की योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचा है और यही वजह है कि लोगों का विश्वास बढ़ रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में अल्पसंख्यक वोट बैंक पारंपरिक रूप से कुछ खास दलों के साथ जुड़ा रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में बदलते सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के कारण विभिन्न दल इस समुदाय तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में एनडीए की ओर से अल्पसंख्यक समुदाय के साथ संवाद बढ़ाना एक बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक के दौरान राज्य के विकास, रोजगार और सामाजिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कई प्रतिनिधियों ने राज्य में शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। वहीं सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया कि विकास योजनाओं में सभी वर्गों को समान प्राथमिकता दी जाएगी।

इसी दौरान पत्रकारों ने उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी से पूर्व सांसद आनंद मोहन द्वारा दिए गए हालिया विवादित बयान पर प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की। हालांकि उन्होंने इस सवाल पर टिप्पणी करने से पूरी तरह परहेज किया। पत्रकारों द्वारा बार-बार पूछे जाने पर भी उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि उन्होंने वह बयान नहीं देखा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, विजय चौधरी का यह रुख बताता है कि जदयू फिलहाल पार्टी के भीतर या सहयोगी दलों के नेताओं की बयानबाजी पर सार्वजनिक विवाद से बचना चाहती है। क्योंकि हाल के दिनों में बिहार की राजनीति में कई बयान ऐसे आए हैं, जिन्होंने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है।

इधर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा बिहार से बाहर रोजगार के लिए गए प्रवासी मजदूरों और युवाओं को वापस बुलाने संबंधी बयान पर भी विजय चौधरी ने खुलकर समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है ताकि युवाओं को बाहर जाने की मजबूरी न हो।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे बिहार में उद्योगों का विस्तार होगा और निवेश बढ़ेगा, वैसे-वैसे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में बिहार के लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों पर कम निर्भर होंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। इसका उद्देश्य राज्य के युवाओं को यहीं बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। विजय चौधरी ने कहा कि यदि राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे तो बाहर काम कर रहे लोग भी वापस लौटकर बिहार में काम करना पसंद करेंगे।

बैठक में शामिल कई लोगों ने सरकार से शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में और अधिक निवेश की मांग भी की। उनका कहना था कि यदि युवाओं को आधुनिक कौशल और रोजगारपरक शिक्षा मिलेगी तो बेरोजगारी की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि बिहार में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच संवाद और विकास की राजनीति को लेकर बढ़ती चर्चा आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। खासकर तब, जब विभिन्न दल लगातार सामाजिक आधार मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

इधर, जदयू और एनडीए के नेताओं का कहना है कि उनकी राजनीति सामाजिक न्याय और विकास दोनों को साथ लेकर चलने की रही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, सरकार का लक्ष्य सभी वर्गों को साथ लेकर राज्य का विकास करना है।

फिलहाल पटना में हुई यह बैठक बिहार की राजनीतिक चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या आने वाले समय में बिहार के अल्पसंख्यक वोट बैंक में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है या नहीं। वहीं एनडीए इस बैठक को अपने लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है।

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