
मधुबनी/खजौली: बिहार सरकार के श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण मंत्री Arun Shankar Prasad के काफिले पर रविवार शाम खजौली विधानसभा क्षेत्र में हमला कर दिया गया। सड़क हादसे में मृत युवक के परिजनों से मिलने पहुंचे मंत्री के लौटने के दौरान कुछ लोगों ने काफिले को घेर लिया और पथराव कर दिया। इस घटना में मंत्री का वाहन क्षतिग्रस्त हो गया, हालांकि मंत्री सुरक्षित हैं।
घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए दरभंगा रेंज के वरिष्ठ अधिकारी भी सक्रिय हो गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
मृतक के परिजनों से मिलने पहुंचे थे मंत्री
जानकारी के अनुसार, ठहर गांव निवासी कृष्ण कुमार ठाकुर की हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। मंत्री अरुण शंकर प्रसाद शोक-संतप्त परिवार से मुलाकात करने पहुंचे थे। परिजनों से मिलने के बाद जब वे लौट रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर विरोध शुरू कर दिया।
महिलाओं को आगे कर किया गया विरोध, फिर हुआ पथराव
मधुबनी के पुलिस अधीक्षक Yogendra Kumar Kaluaahi ने बताया कि कुछ लोगों ने मंत्री के सामने अपनी मांगें रखीं। समझाने के बावजूद विवाद बढ़ गया। आरोप है कि मंत्री के रवाना होने के दौरान कुछ महिलाओं को आगे कर प्रदर्शन किया गया और बाद में पथराव शुरू हो गया। इस दौरान मंत्री की गाड़ी का पिछला शीशा टूट गया।
बाल-बाल बचे मंत्री, सुरक्षा कर्मियों ने संभाला मोर्चा
हमले के दौरान मंत्री के सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत स्थिति संभाली और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस वाहन की टक्कर से युवक की मौत हुई थी, उसका संबंध कथित शराब कारोबारियों से है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की। विरोध प्रदर्शन के दौरान माहौल इतना गरमा गया कि मामला हिंसक रूप ले बैठा।
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मंत्री के काफिले पर हमला करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए वीडियो फुटेज एवं अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
इस घटना ने बिहार की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में हलचल मचा दी है। जनप्रतिनिधि की सुरक्षा को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की नजरें अब पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं।


