समाचार के मुख्य बिंदु: सुशासन और सख्त निगरानी से खजाना हुआ मालामाल
- राजस्व लक्ष्य: चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹3800 करोड़ का लक्ष्य हासिल करने के करीब पहुँचा विभाग; अब तक ₹3252 करोड़ की हुई प्राप्ति।
- बड़ी कार्रवाई: बिना लक्ष्य पूरा किए लीज सरेंडर करने वाली 78 बालू कंपनियों को ‘ब्लैकलिस्ट’ करने का फैसला; दोबारा टेंडर प्रक्रिया में नहीं हो सकेंगी शामिल।
- खनन योद्धा: अवैध खनन पर लगाम लगाने वाले 24 साहसी नागरिकों को ‘बिहारी खनन योद्धा’ पुरस्कार से नवाजा गया; सीधे बैंक खाते में भेजी गई प्रोत्साहन राशि।
- खनिज भंडार: केंद्र सरकार ने रोहतास और गया में 4 बड़े खनन ब्लॉक का किया टेंडर; गया में मिला निकेल, क्रोमियम और बेशकीमती प्लेटिनम का भंडार।
- सराहनीय प्रदर्शन: बिहार के 10 से अधिक जिलों ने राजस्व संग्रह के निर्धारित लक्ष्य को समय से पहले पार किया।
- VOB इनसाइट: 2021-22 के मुकाबले राजस्व संग्रह में हुई दो गुनी से अधिक की बढ़ोतरी बिहार की आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी छलांग है।
पटना | 25 मार्च, 2026
बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में ‘खनन एवं भूतत्व विभाग’ एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है। बुधवार को विकास भवन सचिवालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान उप-मुख्यमंत्री सह खनन मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग की उपलब्धियों और भविष्य की रणनीतियों का ब्योरा पेश किया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, विभाग न केवल अपने राजस्व लक्ष्यों को पूरा कर रहा है, बल्कि अवैध खनन रोकने के लिए जन-भागीदारी को भी बढ़ावा दे रहा है।
राजस्व का गणित: ₹3800 करोड़ के जादुई आंकड़े की ओर
उप-मुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में ₹3800 करोड़ का राजस्व जुटाने का जो संकल्प लिया था, वह मार्च के अंत तक पूरा हो जाएगा।
राजस्व प्राप्ति का विस्तृत ब्योरा:
- अब तक प्राप्त राशि: ₹3252 करोड़।
- कार्य विभागों से अपेक्षित: ₹400 करोड़ (मार्च अंत तक प्राप्ति की उम्मीद)।
- बालू घाटों से अपेक्षित: ₹150 करोड़।
- ऐतिहासिक वृद्धि: वर्ष 2021-22 में विभाग का राजस्व मात्र ₹1600 करोड़ था, जो 2024-25 में बढ़कर ₹3536 करोड़ तक पहुँच गया। इस वर्ष इसके ₹3800 करोड़ पार करने की पूरी संभावना है।
डिफॉल्टर कंपनियों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 78 लीज होल्डर्स पर पाबंदी
खनन विभाग ने उन कंपनियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है जो बीच में ही काम छोड़कर भाग जाती हैं। विभाग ने ऐसी 78 कंपनियों की पहचान की है जिन्होंने राजस्व लक्ष्य हासिल किए बिना ही अपने बालू घाटों की लीज सरेंडर कर दी।
प्रशासनिक निर्देश:
- टेंडर से बाहर: इन 78 कंपनियों को भविष्य में होने वाली किसी भी बालू घाट टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- सख्त निगरानी: उप-मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संसाधनों का दोहन और सरकारी राजस्व की क्षति पहुँचाने वाली कंपनियों को सुशासन में कोई जगह नहीं मिलेगी।
‘बिहारी खनन योद्धा’: अवैध खनन के खिलाफ जन-आंदोलन
अवैध खनन और ढुलाई पर लगाम लगाने के लिए विभाग की ‘बिहारी खनन योद्धा’ पुरस्कार योजना रंग ला रही है। बुधवार को 24 और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
- पुरस्कार राशि: प्रत्येक प्रतिभागी को ₹5000 की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खाते (DBT) में भेजी गई।
- इनाम की शर्तें: अवैध ढुलाई में शामिल ट्रैक्टर पकड़ने पर ₹5000 और ट्रक पकड़ने पर ₹10,000 प्रति वाहन ईनाम देने का प्रावधान है।
- अब तक का रिकॉर्ड: इससे पहले 12 मार्च को भी 72 लोगों को इस योजना के तहत पुरस्कृत किया जा चुका है, जिससे अवैध माफियाओं में खौफ का माहौल है।
बेशकीमती खनिजों का केंद्र बनेगा बिहार: रोहतास और गया में नई खोज
केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार में वृहद् खनन ब्लॉक के टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो आने वाले समय में राज्य की तकदीर बदल सकती है।
- रोहतास जिला: यहाँ तीन बड़े खनिज ब्लॉक की पहचान हुई है, जहाँ मुख्य रूप से ग्लूकोनाइट के भंडार मिले हैं।
- गया जिला: गया में एक वृहद् खनिज ब्लॉक का टेंडर हुआ है। यहाँ के गर्भ में निकेल, क्रोमियम और प्लेटिनम जैसे अत्यंत महंगे और दुर्लभ खनिज पदार्थ मौजूद हैं।
VOB का नजरिया: आर्थिक सुशासन की नई परिभाषा
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि खनन विभाग की यह सक्रियता बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए अनिवार्य है।
- पारदर्शिता: राजस्व में दो गुनी वृद्धि यह दर्शाती है कि लूपहोल्स (कमियों) को बंद किया गया है और ई-चालान जैसी व्यवस्थाओं ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है।
- जनता का सहयोग: ‘खनन योद्धा’ जैसी योजनाओं से आम आदमी को सिस्टम का हिस्सा बनाया जा रहा है, जिससे पुलिस और विभाग की कार्यक्षमता बढ़ी है।
- भविष्य की संभावनाएं: गया और रोहतास में मिले दुर्लभ खनिजों का खनन शुरू होने से न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
विकसित बिहार के लिए मजबूत नींव
उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा द्वारा प्रस्तुत किए गए ये आंकड़े और भविष्य की योजनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि खनन विभाग अब केवल बालू तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बिहार के खनिज संपदा के सही दोहन के लिए आधुनिक तकनीक और सख्त नियमों के साथ तैयार है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ खनन राजस्व के अंतिम आंकड़ों और गया-रोहतास में शुरू होने वाली नई माइनिंग परियोजनाओं की हर अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।


