पटना। बिहार ने मछली उत्पादन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए देश में चौथा स्थान हासिल कर लिया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य में कुल 9.59 लाख टन मछली उत्पादन हुआ है। यह उपलब्धि डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की सतत नीतियों, वैज्ञानिक तकनीकों और मत्स्यपालकों के प्रशिक्षण का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है।
नौवें से चौथे स्थान तक का सफर
वर्ष 2013-14 में बिहार मछली उत्पादन के मामले में देश में नौवें स्थान पर था। सरकारी योजनाओं, तकनीकी सहयोग और आधुनिक मत्स्यपालन पद्धतियों को अपनाने से राज्य ने लगातार प्रगति की।
वर्ष 2023-24 में बिहार चौथे स्थान पर पहुंचा और 2024-25 में 9.59 लाख टन उत्पादन के साथ इस उपलब्धि को और मजबूत कर लिया। बीते दस वर्षों में राज्य ने मछली उत्पादन में लगभग 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।
वैज्ञानिक पद्धति से बढ़ा उत्पादन
राज्य में 7,575.12 हेक्टेयर क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धति से तालाबों का निर्माण कर तकनीक आधारित मत्स्य उत्पादन किया जा रहा है। इससे न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है, बल्कि मछलियों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। बिहार की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार तकनीकों का उपयोग कर मत्स्यपालकों को नई संभावनाएं दी गई हैं।
बायोफ्लॉक तकनीक से बदली तस्वीर
बिहार में बायोफ्लॉक तकनीक ने मछली उत्पादन की परिभाषा ही बदल दी है। कम जगह और कम लागत में अधिक उत्पादन संभव होने के कारण यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
अब तक राज्य में 764 बायोफ्लॉक संरचनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में युवा और छोटे किसान इसे स्वरोजगार के रूप में अपना रहे हैं।
पानी की बचत के साथ आधुनिक उत्पादन
री-सर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) तकनीक के जरिए 90 प्रतिशत तक पानी की बचत हो रही है। यह तकनीक उच्च सघन मत्स्यपालन को संभव बनाती है और उन इलाकों में बेहद कारगर साबित हो रही है, जहां जल संसाधन सीमित हैं।
रोजगार और आय का नया स्रोत
मछली उत्पादन में हुई इस वृद्धि से हजारों किसानों और युवाओं को रोजगार और आय का नया साधन मिला है। मत्स्यपालन अब केवल पारंपरिक पेशा नहीं रह गया है, बल्कि एक संगठित, तकनीक आधारित और लाभकारी उद्योग के रूप में उभर रहा है।
राष्ट्रीय पहचान की ओर बिहार
देश में मछली उत्पादन में चौथे स्थान पर पहुंचना बिहार के लिए सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक नई पहचान भी है। यह साबित करता है कि सही नीतियां, आधुनिक तकनीक और मजबूत इच्छाशक्ति के जरिए बिहार कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।


