पटना: बिहार विधान परिषद में शुक्रवार को शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत बहस हुई। सदन में अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों, शिक्षकों के HRA और जर्जर स्कूल भवनों का मामला प्रमुखता से उठाया गया।
अनुदानित विद्यालयों की स्थिति
डॉ. संजीव कुमार सिंह ने वित्त अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों से जुड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की नियमावली 2011 और संशोधित प्रारूप 2013 के बावजूद इन विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा शामिल नहीं है और कंप्यूटर शिक्षक के पद नहीं बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि त्रि-सदस्यीय समिति ने इस विषय पर रिपोर्ट तैयार की थी, लेकिन अभी तक वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। इसके कारण विद्यालयों के अस्तित्व और शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
HRA पर सवाल
मदन मोहन झा, प्रोफेसर संजय कुमार और नागेंद्र ने शिक्षकों को मकान किराया भत्ता (HRA) देने को लेकर सवाल उठाया। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि सरकार सभी विसंगतियों को दूर करने के प्रयास में है और HRA मामला भी इसके अंतर्गत है। उन्होंने कुछ कमियों को चरणबद्ध तरीके से दूर करने का आश्वासन दिया।
जर्जर स्कूल भवनों की समस्या
विधान परिषद में महेश्वर सिंह ने पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोनहिया के जर्जर भवन की स्थिति को उजागर किया। उन्होंने बताया कि 9 में से 5 कमरे पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं और बाकी कमरों में पढ़ाई और कार्यालय संचालन हो रहा है। उन्होंने सदन में इस संबंध में फोटो भी प्रस्तुत किए। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि जिलाधिकारी से फोटो मंगवाए गए हैं और सरकारी स्कूलों के लिए आवश्यकतानुसार नए भवनों का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में 76 हजार से अधिक स्कूल हैं, इसलिए सभी की व्यवस्था दुरुस्त करने में समय लगेगा, लेकिन सरकार लगातार काम कर रही है।
इस बहस में शिक्षा व्यवस्था, स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति और शिक्षकों के HRA जैसे मुद्दों पर सरकार को व्यापक जवाब देना पड़ा और सदन में गहन चर्चा हुई।


