बिहार में कड़ाके की ठंड का कहर, बढ़ती मौतों के बीच कफन पर 30% तक की छूट

पटना। बिहार में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। राजधानी पटना समेत कई जिलों में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है। ठंड और बर्फीली हवाओं के कारण खासकर बुजुर्गों की मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अंतिम संस्कार से जुड़े सामानों की मांग अचानक बढ़ गई है।

कफन पर भी छूट, बदले हालात

आमतौर पर छूट के बोर्ड कपड़ों या इलेक्ट्रॉनिक दुकानों पर दिखाई देते हैं, लेकिन बदलते हालात में अब पटना में कफन और अंतिम संस्कार की सामग्री पर 30 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। कंकड़बाग इलाके में टेंपो स्टैंड के पास दर्जनों दुकानें हैं, जहां अंतिम संस्कार से जुड़ा सामान बेचा जाता है।

ठंड से बढ़ा अंतिम संस्कार का दबाव

व्यवसायियों के अनुसार, कड़ाके की ठंड के कारण मौतों की संख्या बढ़ी है। अकेले दीघा घाट में रोजाना 30 से 40 अंतिम संस्कार हो रहे हैं। इसी वजह से कफन और अन्य सामग्री की मांग में अचानक उछाल आया है।

32 सामग्री का पैकेज ₹2200–2500 में

अंतिम संस्कार के लिए करीब 32 अलग-अलग सामग्रियों की जरूरत होती है। सामान्य तौर पर इनकी कीमत ₹3500 तक होती है, लेकिन छूट के बाद यही पैकेज ₹2200 से ₹2500 में उपलब्ध कराया जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि इससे शोकग्रस्त परिवारों को आर्थिक राहत मिलती है।

तापमान में गिरावट, जनजीवन प्रभावित

पटना में इस समय कोल्ड वेव की स्थिति बनी हुई है। घने कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम हो गई है, जिसका असर सड़क यातायात, ट्रेनों और उड़ानों पर भी पड़ रहा है। रात के समय ठंड और अधिक बढ़ जा रही है, जिससे बुजुर्गों और बीमार लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

श्मशान घाटों पर महंगे दाम

राजधानी के प्रमुख श्मशान घाट—दीघा घाट, बांस घाट, गुलबी घाट और जनार्दन घाट—पर अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को 32 सामग्रियों के लिए ₹8,000 से ₹10,000 तक चुकाने पड़ते हैं। विकल्प न होने के कारण कई बार लोग मजबूरी में ऊंची कीमत चुकाते हैं।

दुकानदारों का दावा—लाभ नहीं, मदद उद्देश्य

कंकड़बाग के दुकानदार राजेश कुमार बताते हैं—

“श्मशान घाट पर यही सामान बहुत महंगा मिलता है। हम लोग ₹2200–2500 में पूरा पैकेज दे देते हैं, ताकि मृतक के परिवार को आर्थिक राहत मिल सके।”

वहीं इलाके के पुराने दुकानदार अमर कुमार कहते हैं—

“हमारा मकसद मुनाफा नहीं, मदद करना है। अगर कोई गरीब परिवार आता है और पैसे देने की स्थिति में नहीं होता, तो कई बार हम मुफ्त में भी जरूरी सामान दे देते हैं।”

मानवीय संकट के बीच राहत की कोशिश

कुल मिलाकर, कड़ाके की ठंड ने जहां जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं अंतिम संस्कार से जुड़े व्यवसाय में भी असामान्य बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे कठिन समय में कुछ दुकानदारों द्वारा दी जा रही राहत शोकग्रस्त परिवारों के लिए सहारा बन रही है।


 

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