
पटना/बिहटा। बिहार की पहचान अब केवल कृषि प्रधान राज्य के रूप में नहीं, बल्कि उभरते हुए औद्योगिक और स्टार्टअप केंद्र के रूप में भी पुख्ता हो रही है। राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों और जमीनी स्तर पर हो रहे बदलावों की समीक्षा के उद्देश्य से उद्योग विभाग के सचिव और बियाडा (BIADA) व इडा (Ida) के प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को राज्य के तीन महत्वपूर्ण केंद्रों—आईआईटी पटना, एफडीडीआई बिहटा और हीरो साइकिल्स यूनिट—का सघन दौरा किया। यह दौरा बिहार में तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम, कौशल विकास के आधुनिक केंद्रों और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) की नई संभावनाओं को रेखांकित करता है। सचिव के इस दौरे ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार अब पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर डीप-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में लंबी छलांग लगाने के लिए तैयार है।
आईआईटी पटना: जहां ‘आइडिया’ बन रहे हैं ‘प्रोडक्ट’
दौरे की शुरुआत आईआईटी पटना के इनक्यूबेशन सेंटर से हुई, जो आज बिहार के बौद्धिक और तकनीकी विकास का मुख्य केंद्र बन चुका है। कुंदन कुमार ने यहाँ विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने संस्थान में मौजूद पीसीबी (PCB) डेवलपमेंट लैब, टेस्टिंग एवं कैलिब्रेशन लैब, मैकेनिकल लैब, क्लीन रूम और बायोनेस्ट लैब जैसी विश्वस्तरीय सुविधाओं का निरीक्षण किया। ये प्रयोगशालाएं उन युवा उद्यमियों के लिए ‘सैंडबॉक्स’ की तरह काम कर रही हैं, जो अपने नवाचारी विचारों को वास्तविक उत्पादों में बदलने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान कुंदन कुमार ने कई स्टार्टअप फाउंडर्स के साथ सीधा संवाद किया। उन्होंने उनके द्वारा विकसित किए जा रहे इनोवेटिव प्रोडक्ट्स को देखा और उनके अनुभवों को सुना। बातचीत के दौरान यह उभरकर आया कि बिहार के युवा अब केवल नौकरी की तलाश में नहीं हैं, बल्कि वे हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे जटिल क्षेत्रों में समाधान दे रहे हैं। इस अवसर पर आईआईटी पटना के निदेशक टी. एन. सिंह के साथ भी एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु यह था कि कैसे शैक्षणिक अनुसंधान (Academic Research) और औद्योगिक आवश्यकताओं (Industrial Needs) के बीच की दूरी को पाटा जाए। सरकार की मंशा स्टार्टअप्स के लिए ऐसे अवसर और ढांचागत सहयोग तैयार करने की है, जिससे बिहार से निकलने वाले उत्पाद वैश्विक मानकों पर खरे उतरें।
एफडीडीआई बिहटा: युवाओं के हुनर को मिल रही वैश्विक पहचान
औद्योगिक प्रगति के लिए केवल तकनीक काफी नहीं है, बल्कि कुशल कार्यबल (Skilled Workforce) भी अनिवार्य है। इसी कड़ी में कुंदन कुमार ने फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई), बिहटा का दौरा किया। यहाँ उन्होंने कौशल विकास और विनिर्माण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की सराहना की। एफडीडीआई के अधिकारियों और प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत में उन्होंने उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग और आधुनिक औद्योगिक पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की।
छात्रों ने अपनी क्रिएटिविटी और डिजाइनिंग कौशल का प्रदर्शन करते हुए कई प्रेजेंटेशन दिए, जिन्हें देखकर विभाग की टीम काफी प्रभावित हुई। कुंदन कुमार ने कहा कि वर्कशॉप और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ही वह माध्यम है जिससे युवा आज की बदलती औद्योगिक जरूरतों के लिए तैयार हो सकेंगे। बिहार सरकार की भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि बिहटा में लेदर फुटवियर एक्सेसरीज पार्क स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है। यह पार्क राज्य के चर्म उद्योग और फुटवियर सेक्टर को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
हीरो साइकिल्स यूनिट: बिहार के औद्योगिक विकास का पहिया
बिहटा के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित हीरो साइकिल्स लिमिटेड की यूनिट का दौरा राज्य के विनिर्माण क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है। लगभग 7 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैली यह यूनिट वर्तमान में करीब 500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दे रही है। कुंदन कुमार ने यहाँ उत्पादन क्षमता और परिचालन व्यवस्था का विस्तृत आकलन किया।
उन्होंने यूनिट के प्रबंधन के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की विस्तार योजनाओं पर चर्चा की गई। यह यूनिट इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि यदि सही वातावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर मिले, तो बिहार बड़ी औद्योगिक इकाइयों के लिए एक सुरक्षित और लाभदायक गंतव्य साबित हो सकता है। सचिव ने यूनिट के संचालन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए और आश्वासन दिया कि सरकार उद्योगों के विस्तार के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।


