
पटना, 4 जून 2026। बिहार में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा रोडमैप पेश किया है। राज्य में 11 मेगा फूड पार्क और सभी 38 जिलों में फूड पार्क स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही उद्योगों के लिए 50 हजार एकड़ का भूमि बैंक तैयार करने का भी निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
लोकसेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए और औद्योगिक विकास की योजनाओं को तेजी से लागू करने पर जोर दिया।
11 मेगा और 38 जिला स्तरीय फूड पार्क का निर्माण
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए 11 मेगा फूड पार्क और सभी जिलों में फूड पार्क विकसित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि फूड प्रोसेसिंग इकाइयों के विस्तार से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और विपणन के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कृषि आधारित रोजगार में वृद्धि होगी।
50 हजार एकड़ का भूमि बैंक बनेगा
औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने 50 हजार एकड़ का भूमि बैंक विकसित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि की उपलब्धता सबसे बड़ी आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज किया जाए और उद्योगों के लिए उपयुक्त जमीन चिह्नित कर उसे भूमि बैंक में शामिल किया जाए।
भूमि अधिग्रहण में संवाद पर जोर
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में लोगों के साथ संवाद स्थापित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन किसानों और भूमि मालिकों की जमीन अधिग्रहित की जानी है, उनसे बातचीत कर उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास संबंधी जानकारी दी जाए।
उन्होंने कहा कि लोगों का विश्वास जीतकर ही विकास परियोजनाओं को सफल बनाया जा सकता है।
निवेशकों के लिए बनेगा बेहतर माहौल
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बिहार को निवेश के लिए आकर्षक राज्य के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों को सभी आवश्यक सुविधाएं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि उद्योगों से जुड़ी स्वीकृतियों और अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि निवेशकों का विश्वास बढ़े।
फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर पर फोकस
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, फार्मा तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्रों में मौजूद संभावनाओं पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि बिहार में टेक्सटाइल इंडस्ट्रियल सेंटर विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जाए। साथ ही स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत कर युवाओं को नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर प्रदान किए जाएं।
रोजगार सृजन को मिलेगी रफ्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के विकास से राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं जिनसे स्थानीय युवाओं को अधिक से अधिक रोजगार मिल सके।
उन्होंने कहा कि बिहार के विकास की नई तस्वीर उद्योग, निवेश और रोजगार के माध्यम से ही तैयार होगी।
निवेश और औद्योगिक विकास पर विशेष जोर
बैठक में उद्योग विभाग के अधिकारियों ने राज्य में चल रही विभिन्न औद्योगिक योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने सभी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा करने और समयबद्ध तरीके से उन्हें पूरा करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि बिहार को पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए भूमि उपलब्धता, निवेश प्रोत्साहन, उद्योग अनुकूल वातावरण और आधारभूत संरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बदल सकती है बिहार की औद्योगिक तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 11 मेगा फूड पार्क, 38 जिला स्तरीय फूड पार्क और 50 हजार एकड़ भूमि बैंक की योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो बिहार में औद्योगिक निवेश को नई दिशा मिल सकती है। इससे कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सभी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए तेज गति से कार्य किया जाए, ताकि बिहार निवेश, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना सके।


