HIGHLIGHTS:
- घबराएं नहीं: राज्य में घरेलू गैस सिलेंडरों का पर्याप्त भंडार, किल्लत की खबरें महज अफवाह।
- नया नियम: अब पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के 25 दिन बाद ही कर सकेंगे नई बुकिंग।
- समय सीमा: बुकिंग के 2 से 3 दिनों के भीतर घर पहुँचेगा गैस सिलेंडर।
- निगरानी: खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग रख रहा है वितरण पर पैनी नजर।
अफवाहों पर ‘ब्रेक’: बिहार में नहीं है गैस की कोई कमी
पटना: बिहार के रसोई घरों के लिए राहत भरी खबर है। पिछले कुछ दिनों से गैस की किल्लत को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में घरेलू गैस (LPG) का पर्याप्त भंडार मौजूद है। पेट्रोलियम एजेंसियों ने भी पुष्टि की है कि आपूर्ति चेन पूरी तरह दुरुस्त है। ऐसे में उपभोक्ताओं को गैस एजेंसियों पर अनावश्यक भीड़ लगाने या ‘पैनिक बुकिंग’ करने की कोई जरूरत नहीं है।
बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव: ’25 दिन’ का फॉर्मूला
गैस वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू की है। उपभोक्ताओं को अब इन नियमों का पालन करना होगा:
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नियम |
विवरण |
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बुकिंग अंतराल |
पिछले सिलेंडर की डिलीवरी मिलने के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग होगी। |
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डिलीवरी टाइम |
नंबर (बुकिंग) लगने के बाद 2 से 3 दिनों के अंदर सिलेंडर की आपूर्ति की जाएगी। |
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उद्देश्य |
जमाखोरी रोकना और सभी को समान रूप से गैस उपलब्ध कराना। |
विभाग की पैनी नजर: बिचौलियों की अब खैर नहीं
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने कमर कस ली है। विभाग के अधिकारियों द्वारा गैस वितरण प्रणाली की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि:
- वितरक किसी भी स्थिति में गैस की कृत्रिम किल्लत (Artificial Scarcity) पैदा न करें।
- उपभोक्ताओं को उनकी बारी के अनुसार पारदर्शी तरीके से सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए।
- भ्रामक खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं से अपील: धैर्य रखें और जागरूक बनें
विभाग ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें। यदि कोई वितरक अनावश्यक देरी करता है या स्टॉक होने के बावजूद मना करता है, तो इसकी शिकायत संबंधित विभागीय अधिकारियों से करें। बेवजह की भीड़ न केवल व्यवस्था बिगाड़ती है, बल्कि कालाबाजारी को भी बढ़ावा देती है।
VOB का नजरिया: नियम आपकी सुविधा के लिए हैं!
अक्सर देखा गया है कि जैसे ही आपूर्ति को लेकर हल्की सी भी चर्चा होती है, लोग सिलेंडर स्टॉक करने लगते हैं। 25 दिन वाला यह नियम इसी ‘पैनिक’ को रोकने के लिए है। सरकार का यह कदम सुनिश्चित करेगा कि गैस उसी को मिले जिसे वास्तव में जरूरत है। बिहार के उपभोक्ताओं को बस थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत है, क्योंकि आपकी रसोई का ईंधन सरकार की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।


