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पटना, 07 अगस्त | देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों और उनके परिजनों को अब बिहार सरकार का और भी ज्यादा साथ मिलेगा। सैनिकों की शहादत को केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि ठोस कल्याण योजनाओं से सम्मानित करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सभी 25 जिलों में “जिला सैनिक कल्याण कार्यालय” स्थापित किए जा रहे हैं, जिनकी कमान खुद भूतपूर्व सैनिकों को सौंपी जा रही है।

13 से 25 जिलों तक का विस्तार:

अब तक राज्य के केवल 13 जिलों में ही यह कार्यालय सक्रिय थे, लेकिन 2025 की योजना के तहत 12 नए जिलों – नालंदा, बेगूसराय, सीतामढ़ी, मधुबनी, समस्तीपुर, कैमूर, औरंगाबाद, जहानाबाद, कटिहार, सहरसा, पश्चिमी चंपारण और गोपालगंज – में भी सैनिक कल्याण कार्यालयों की स्थापना अंतिम चरण में है।

पूर्व सैनिकों को मिल रहा पुनर्नियोजन:

बिहार सरकार का यह कदम न केवल कल्याणकारी है, बल्कि पूर्व सैनिकों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने वाला भी है। अब इन कार्यालयों में संचालन से लेकर प्रशासनिक कार्यों तक की ज़िम्मेदारी उन्हीं पूर्व सैनिकों को सौंपी जा रही है, जिन्होंने कभी वर्दी में देश की सेवा की थी।

सैनिक कल्याण निदेशालय के निदेशक ब्रिगेडियर मृगेंद्र कुमार ने जानकारी दी कि पहले केवल दो जिलों में ही स्थायी जिला सैनिक कल्याण पदाधिकारी नियुक्त थे, लेकिन अब नियुक्तियों की प्रक्रिया व्यापक स्तर पर चल रही है।

भर्ती प्रक्रिया हुई तेज़:

सहायक निदेशक कर्नल एस.के. त्रिपाठी के अनुसार, 2024 में रिक्त 11 पदों पर पूर्व सैन्य अधिकारियों की नियुक्ति रोस्टर और आरक्षण नीति के तहत की गई है। वर्तमान में नौ जिलों में नियुक्तियाँ पूरी हो चुकी हैं, और बाकी जिलों में प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

लिपिक, व्यवस्थापक, परिचारी – हर पद पर पूर्व सैनिक:

  • 25 कार्यालयों में 31 लिपिक पदों पर भूतपूर्व सैनिकों की नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
  • 25 कल्याण व्यवस्थापक पदों के लिए भी परीक्षा हो चुकी है, जल्द ही नियुक्तियाँ होंगी।
  • डाटा एंट्री ऑपरेटर, वाहन चालक, कार्यालय परिचारी, रात्रि पहरी जैसे पदों पर भी अब पूर्व सैनिकों को प्राथमिकता दी जा रही है।

कल्याण से गौरव की ओर:

बिहार सरकार का यह कदम सिर्फ सरकारी प्रक्रिया नहीं है, यह उन हज़ारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनके बेटे, पति या पिता ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। सैनिकों की शहादत को केवल स्मारक तक सीमित नहीं रखा जाएगा, अब हर ज़िले में उनकी विधवाओं, बच्चों और माता-पिता को सहायता, मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए समर्पित कार्यालय होंगे।

एक राष्ट्र, एक कर्तव्य – सैनिकों के प्रति सम्मान:

यह कदम साबित करता है कि “वीर जवान सिर्फ सीमा के नहीं, समाज के भी प्रहरी हैं”। और बिहार सरकार का यह संदेश अब हर ज़िले में गूंजेगा – “हम आपके साथ हैं, क्योंकि आपने देश के लिए सब कुछ दिया।”


 

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